चीफ़ एडिटर – अमर नाथ साहू
क्राइम ब्यूरो – पंकज भाटिया

वाराणसी से संत समाज ने ‘सनातन शंखनाद’ कर दिया है। अखिल भारतीय संत समिति ने राहुल गांधी, पप्पू यादव और समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद पर सनातन और साधु-संतों का अपमान करने का आरोप लगाया। कहा कि अब हर जिले में आंदोलन, सभाओं और जनसंपर्क के जरिए अपना पक्ष जनता तक पहुंचाएंगे। अखिल भारतीय संत समिति की राष्ट्रीय बैठक में देशव्यापी जनजागरण और विरोध अभियान चलाने का ऐलान किया गया है।
वाराणसी में रविवार को अखिल भारतीय संत समिति की त्रैमासिक महाबैठक आयोजित हुई। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से समिति के महामंत्रियों के अलावा काशी विद्वत परिषद के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में सनातन धर्म, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर चर्चा हुई। हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और संत समाज से जुड़े विवादों पर सबसे अधिक मंथन हुआ।
संसद परिसर की घटना पर जताई आपत्ति
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि संसद परिसर में हाल में हुई राजनीतिक गतिविधियां लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं थीं। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप होने पर कार्रवाई कानून के अनुसार होनी चाहिए, लेकिन पूरे संत समाज या धार्मिक परंपरा को विवाद में घसीटना उचित नहीं है। राजनीतिक संदेश देने के लिए भगवा वस्त्रों और संत परंपरा को निशाना बनाया गया, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
तीन नेताओं पर लगाए आरोप
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने राहुल गांधी, पप्पू यादव और समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद का नाम लेते हुए उन पर सनातन धर्म के विरुद्ध वातावरण बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संत समाज अब ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज नहीं करेगा और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएगा।
उन्होंने बताया कि इन नेताओं के खिलाफ वाराणसी में एफआईआर दर्ज कराने की पहल की गई है। साथ ही राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर संबंधित सांसदों की सदस्यता समाप्त करने पर विचार करने की मांग भी की गई है।
पूरे देश में चलेगा ‘सनातन शंखनाद’ अभियान
बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि ‘सनातन शंखनाद’ अभियान पूरे देश में चलाया जाएगा। इसके तहत राज्यों और जिलों में संत समाज की सभाएं, जनजागरण कार्यक्रम और सार्वजनिक संवाद आयोजित किए जाएंगे। समिति का कहना है कि अभियान का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि सनातन धर्म और संत समाज के सम्मान से जुड़े मुद्दों को जनता के सामने रखना है।
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि संत समाज संबंधित नेताओं के निर्वाचन क्षेत्रों में भी जाएगा और लोकतांत्रिक तरीके से अपना पक्ष रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जहां जरूरत होगी वहां ज्ञापन, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और सार्वजनिक सभाओं का आयोजन किया जाएगा। साथ ही दावा किया कि अभियान के दौरान हर जिले में उन लोगों की पहचान सार्वजनिक की जाएगी जिन्हें समिति “सनातन विरोधी” मानती है।



