चीफ़ एडिटर – अमर नाथ साहू
रिपोर्ट – अभिषेक सोनकर

यूपी में विपक्षी नेताओं, कार्यकर्ताओं और किसान संगठनों की पुलिस निगरानी के विरोध में गुरुवार को कई विपक्षी दलों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सीपीएम, सीपीआई, सीपीआई (एमएल), कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और फॉरवर्ड ब्लॉक समेत विभिन्न दलों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने वाराणसी जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। इसमें राजनीतिक कार्यकर्ताओं की निगरानी तत्काल रोकने और उनके संवैधानिक अधिकारों के रक्षा की मांग की गई।
महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले नेताओं, किसान संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर पुलिस के जरिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का विरोध करना लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक का अधिकार है। इसके बावजूद आंदोलन और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े लोगों की निजी जानकारी जुटाई जा रही है।
बैंक खाते से वंश वृक्ष तक की जानकारी मांगने का आरोप
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं से पुलिस बैंक खातों, आधार कार्ड, पैन कार्ड, परिवार के वंश वृक्ष और निजी व्यवसाय से जुड़ी जानकारी मांग रही है। उनका कहना है कि कई मामलों में इसके लिए कोई स्पष्ट लिखित आदेश या आधिकारिक नोटिस भी नहीं दिया गया।
राघवेंद्र चौबे ने कहा कि किसी व्यक्ति की निजी या वित्तीय जानकारी लेने के लिए कानूनी आधार और निर्धारित प्रक्रिया जरूरी है। केवल मौखिक निर्देश पर दस्तावेज और पारिवारिक जानकारी मांगना लोगों में डर का माहौल पैदा कर रहा है।
निजता के अधिकार का उल्लंघन’
विपक्षी दलों ने पुलिस की कथित निगरानी को नागरिकों के निजता के अधिकार से जोड़ते हुए इसे गंभीर मामला बताया। नेताओं ने कहा कि किसी व्यक्ति की निजी और वित्तीय जानकारी उसकी सहमति और उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना जुटाना चिंता का विषय है।
चौबे ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों और किसान संगठनों से जुड़े लोगों को उनकी राजनीतिक गतिविधियों के कारण निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं को डराने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए।



