चीफ़ एडिटर – अमर नाथ साहू
यूपी हेड – अजय लखमानी

वाराणसी में घर से बाहर निकलने का रास्ता बंद होने से परेशान 50 वर्षीय कविता उपाध्याय ने बुधवार शाम फांसी लगाकर जान दे दी। बेटे का आरोप है कि करीब दो साल से रास्ते से कब्जा हटवाने के लिए अफसरों के चक्कर लगा रही थीं।
बेटे के मुताबिक, डीएम को 50 से ज्यादा बार शिकायत की गई। सालभर पहले परिवार ने डीएम कार्यालय के बाहर धरना भी दिया था। तहसील में एडीएम को 100 से अधिक प्रार्थना पत्र दिए। बेटे का कहना है कि मां ने अफसरों से न्याय न मिलने पर जान दे देने की बात भी कही थी।
अब कविता की मौत के बाद भी रास्ते का विवाद खत्म नहीं हुआ है। परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव को घर से बाहर ले जाने का रास्ता नहीं होने का हवाला दे रहे हैं। उन्होंने शव उठाने से मना कर दिया है। गुरुवार सुबह तक करीब 14 घंटे से शव घर के बाहर रखा रहा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर परिवार को समझाने में जुटे हैं।

दो साल पहले पड़ोसियों ने रास्ता बंद किया
मामला बड़ागांव थाना क्षेत्र के अहरक गांव का है। यहां संतोष उपाध्याय का मकान गांव के बीच में है। बेटे विशाल के मुताबिक, घर से बाहर निकलने वाला करीब 6 फीट चौड़ा रास्ता नवीन परती की जमीन से होकर जाता है। आरोप है कि करीब दो साल पहले मनीष उपाध्याय और अमित उपाध्याय के परिजनों ने इस जमीन पर चहारदीवारी कर दी। इसके बाद परिवार का रास्ता बंद हो गया। सिर्फ दो फीट के वैकल्पिक रास्ते से आते-जाते हैं।
बेटे का आरोप है कि इसी रास्ते से कब्जा हटवाने के लिए कविता के साथ पूरे परिवार ने डीएम, पुलिस अधिकारियों और तहसील स्तर के अधिकारियों से 150 बार से ज्यादा शिकायत की।
22 जुलाई को डीएम की जनसुनवाई में आखिरी शिकायत
परिवार के मुताबिक, रास्ते के मामले में आखिरी शिकायत 22 जुलाई 2026 को डीएम की जनसुनवाई में की गई थी। इसमें 12 अगस्त को आख्या लगाकर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया। आख्या में लिखा गया कि शिकायत सही नहीं पाई गई है। परिवार इस निष्कर्ष से संतुष्ट नहीं था और रास्ता बंद होने की समस्या बनी रही।
बुधवार शाम शौचालय में फंदे से लटकी मिलीं
विशाल के मुताबिक, पिता दिल्ली में रहते हैं, घर में वो मां और दादी के साथ रहता है। पड़ोस में चाचा का परिवार भी रहता है। बुधवार दोपहर बाद मां कविता दिखाई नहीं दीं। घर और आसपास तलाश की। सभी परेशान थे, लेकिन किसी का भी ध्यान शौचालय की तरफ नहीं गया। शाम करीब 7 बजे शौचालय जाने के लिए मैंने उसका दरवाजा खोला तो मां फंदे से लटकी मिलीं। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतरवाया।
अब अंतिम संस्कार के लिए भी रास्ते की मांग
कविता की मौत के बाद परिजनों ने शव घर के बाहर रख दिया। उनका कहना है कि जब तक रास्ते की समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। गुरुवार सुबह तक शव करीब 14 घंटे से घर के बाहर रखा रहा। एसपी बिंद्रा, एसओ राजीव कुमार सिंह और तहसीलदार मौके पर मौजूद हैं। अधिकारी परिवार को समझाकर अंतिम संस्कार कराने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि परिजन रास्ता दिलाने की मांग पर अड़े हैं।
पति दिल्ली में नौकरी करते हैं, बेटा कर रहा एमए
कविता के पति संतोष उपाध्याय दिल्ली की एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। उनका बेटा विशाल उपाध्याय एमए की पढ़ाई कर रहा है। परिजनों के अनुसार, स्वर्गीय लक्ष्मी नारायण उपाध्याय के चार बेटे संतोष, अजय, अक्षयवर नाथ और केदार नाथ उपाध्याय हैं। परिवार लंबे समय से रास्ते की समस्या झेल रहा है।
पति ने ऐसा कदम न उठाने के लिए समझाया था

परिजनों के मुताबिक, कविता को लेकर परिवार पहले से चिंतित था। पति संतोष और अन्य परिजनों ने उन्हें समझाने का प्रयास भी किया था। लेकिन रास्ते की समस्या लगातार बनी रही। परिवार का कहना है कि अगर समय रहते अधिकारियों ने उनकी शिकायत पर कार्रवाई की होती तो शायद यह नौबत नहीं आती।
एसडीएम बोले- तहसीलदार न्यायालय में मामला लंबित
एसडीएम का कहना है कि रास्ते से जुड़ा मामला तहसीलदार न्यायालय में लंबित है। उनके मुताबिक, जिस जमीन को लेकर विवाद है, वह नवीन परती की जमीन है। उधर, बेटे का कहना है कि जिसे वैकल्पिक रास्ता बताया जा रहा है, वह महज 2 फीट चौड़ा है। उनका कहना है कि इतने संकरे रास्ते से परिवार का सामान्य आवागमन कैसे होगा।



