चीफ एडिटर – अमर नाथ साहू
रिपोर्ट – सत्यम गुप्ता

बैंकों की शुक्रवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल है। इस हड़ताल से वाराणसी में 800 करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ है। वहीं जिले की करीब 400 शाखाओं में तालाबंदी है। कर्मचारी बैंक के गेट पर खड़े होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन 5-डे वर्किंग, फेयर PLI (परफॉर्मेंस लिंड इंसेंटिव) को लेकर किया जा रहा है। इसके अलावा आपसी सहमति से सेवा शर्तों की सुनिश्चित करने समेत अन्य मांगों को लेकर वाराणसी में 3000 बैंक कर्मी हड़ताल पर हैं।
हड़ताल के चलते बैंक शाखाओं में सामान्य बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं। इससे ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। बैंक कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को लेकर सरकार और संबंधित पक्षों से बातचीत चल रही है, लेकिन समाधान नहीं निकलने के कारण उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
5-डे वर्किंग पर सरकार ने किया था समझौता
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन वाराणसी के डिप्टी कन्वेनर और यूपी बैंक इम्प्लाइज यूनियन के सेक्रेटरी संजय कुमार शर्मा ने बताया – सरकार ने हमारे साथ द्विपक्षीय समझौते में यह कमिटमेंट किया था की बैंकिग सेक्टर में भी 5 डे वर्किंग लागू करेंगे। भारत के सारे इंडस्ट्री में 5 डे बैंकिंग हैं। हमारे यहां नहीं है। सेकेंड और फोर्थ सटरडे को छुट्टी होती है। हमारी मांग है की 5 डे बैंकिंग की जाए बदले में जितने काम के घंटे हैं। उसे सोमवार से शुक्रवार के काम में बढ़ाकर एडजस्ट कर लें।
सरकारी बैंकों में हड़ताल
संजय कुमार शर्मा ने आगे बताया- इसके अलावा PLI है वो बैंक के चपरासी से लेकर 4, 5, 6 स्केल के कर्मचारियों के बीच में एक सामान बांटा जाए। सरकार इन सभी मांगों पर मनमानी कर रही है। इसलिए आज यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक युनियन के आह्वान पर जिसमें 7 घटक दल हैं। पूरे भारत वर्ष में सरकारी बैंकों में हड़ताल का आह्वान किया है। यदि सरकार आज हमारी मांग नहीं मांगेगी तो 27 और 28 सितंबर को हम दो दिवसीय हड़ताल पर जाएंगे।
800 करोड़ का कारोबार प्रभावित
बैंक कर्मचारियों के मुताबिक, आज की हड़ताल से बनारस शहर में करीब 400 करोड़ रुपये और पूरे वाराणसी जनपद में लगभग 800 करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ने का दावा किया जा रहा है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 27 और 28 तारीख को भी हड़ताल जारी रखी जाएगी। इसके बावजूद सरकार की ओर से मांगों को पूरा नहीं किया गया तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन धरने पर जाने के लिए बाध्य होंगे।



