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बीएचयू में राष्ट्रीय क्रीड़ा सम्मेलनः कुलपति बोले- खिलौने सिर्फ मनोरंजन नहीं, शिक्षा और नवाचार का माध्यम

चीफ एडिटर – अमर नाथ साहू
मण्डल ब्यूरो – चन्दन रंजीत यादव

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वाराणसी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘क्रीड़ा- नॉलेज, रिकग्निशन एंड एन्हांसमेंट थ्रू एजुकेशनल डिजाइन एंड एक्टिविटी’ का शुभारंभगुरुवार को हुआ। सम्मेलन का विषय “रेकग्निशन ऑफ टॉयज फॉर गेम्स एंड स्पोर्ट्सः इनोवेशन, इंडिजिनस नॉलेज, फिजिकल लिटरेसी एंड सस्टेनेबल प्ले इकोसिस्टम्स” है।

उद्घाटन समारोह में बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि खिलौनों को केवल बच्चों के मनोरंजन की वस्तु मानने के बजाय शिक्षा, नवाचार और सामाजिक सहभागिता के माध्यम के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने खिलौना बाजार को गंभीर व्यवसाय बताते हुए डिजाइन में मौलिकता, लोकप्रियता, उपयोग में सरलता और समावेशिता पर ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी शब्द आधारित और बैठकर खेले जाने वाले खेल विकसित करने की संभावनाओं का उल्लेख किया।

कुलपति ने खिलौनों के निर्माण में लकड़ी, प्लास्टिक, एल्युमिनियम और आधुनिक इंजीनियरिंग पदार्थों पर शोध तथा किफायती और बड़े पैमाने पर उत्पादन योग्य निर्माण प्रक्रियाओं की आवश्यकता बताई। उन्होंने विज्ञान, इंजीनियरिंग और गणित की शिक्षा में शैक्षणिक खिलौनों की उपयोगिता पर भी चर्चा की।

विशिष्ट अतिथि पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने पारंपरिक खिलौनों, शिल्प और सामुदायिक ज्ञान के संरक्षण व दस्तावेजीकरण पर जोर दिया। कला संकाय की संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने एनईपी-2020 के तहत गतिविधि आधारित शिक्षण और ‘टॉय पेडागॉजी’ को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

आयोजन सचिव प्रो. बी.सी. कपरी ने कहा कि खिलौने बच्चों में सीखने, निर्णय लेने और आंख-हाथ समन्वय जैसी क्षमताओं के विकास में सहायक हैं। सम्मेलन में शोध-पत्र, पोस्टर प्रस्तुतियां, खिलौनों एवं पारंपरिक खेलों के प्रदर्शन, कार्यशालाएं और व्याख्यान आयोजित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर “क्रीड़ा डिजाइन एक्टिविटी हैंडबुक” का विमोचन भी किया गया।

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