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पूर्वांचल का एम्स BHU अस्पताल हुआ जलमग्नः अस्पताल की गेट से ही वापस लौटे सैकड़ों मरीज, परिसर में कमरभर पानी लगा

चीफ़ एडिटर – अमर नाथ साहू
रिपोर्ट – सत्यम गुप्ता

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पूर्वांचल की स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सर सुंदरलाल अस्पताल की व्यवस्थाएं मंगलवार को लगातार बारिश के बाद बेबस नजर आईं। बीते करीब 12 घंटे से जारी बारिश भले ही थम गई, लेकिन अस्पताल परिसर में जलभराव ने मरीजों और तीमारदारों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दीं। अस्पताल के ओपीडी क्षेत्र से लेकर जांच काउंटर तक जाने वाले रास्ते कमर तक पानी में डूबे रहे। ऐसे में बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंचने के बावजूद इलाज और जांच कराए बिना वापस लौटने को मजबूर हुए।

आम दिनों में सर सुंदरलाल अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब पांच से छह हजार मरीज उपचार और चिकित्सकीय परामर्श के लिए पहुंचते हैं। लेकिन बारिश और जलभराव के कारण मरीजों की संख्या में भारी गिरावट देखने को मिली। शनिवार को ओपीडी में एक हजार मरीज भी नहीं पहुंच सके। मंगलवार को भी अस्पताल परिसर में जलभराव के चलते मरीजों को इलाज के लिए पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

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कमर तक पानी, व्हीलचेयर और स्ट्रेचर भी बेकार

अस्पताल परिसर में पानी इतना अधिक भर गया कि मरीजों को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाली व्हीलचेयर और स्ट्रेचर तक चलाना मुश्किल हो गया। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्ग, दिव्यांग और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को हुई। कई मामलों में परिजनों को मरीजों को गोद में उठाकर पानी के बीच से अस्पताल के भीतर ले जाना पड़ा।

मरीजों और तीमारदारों को ओपीडी की पर्ची बनवाने के लिए करीब 150 मीटर तक कमर भर पानी से होकर गुजरना पड़ा। पानी के बीच से गुजरते हुए कई मरीज और उनके परिजन फिसलने के डर के बीच किसी तरह अस्पताल के काउंटर तक पहुंचे। अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह का जलभराव मरीजों के लिए बड़ी परेशानी बन गया।

डॉक्टर को दिखाने के बाद भी खत्म नहीं हुई परेशानी

ओपीडी में डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद मरीजों की परेशानी और बढ़ गई। ब्लड जांच के लिए सीसीआई लैब तक पहुंचने के लिए करीब सौ मीटर तक पानी भरे रास्ते से होकर जाना पड़ा। गंभीर मरीजों और बुजुर्गों के लिए यह रास्ता तय करना बेहद मुश्किल रहा। जिन मरीजों को जांच के बाद दोबारा चिकित्सक से परामर्श लेना था, उन्हें भी इसी जलभराव से होकर कई बार आना-जाना पड़ा।

बाल रोग, ईएनटी और नेत्र विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती

जलभराव का सबसे ज्यादा असर बाल रोग विभाग, ईएनटी और नेत्र रोग विभाग की ओर जाने वाले रास्तों पर दिखाई दिया। इन विभागों तक पहुंचने वाले रास्ते पानी में डूबे होने के कारण मरीजों को भारी दिक्कत हुई। छोटे बच्चों को लेकर पहुंचे अभिभावक विशेष रूप से परेशान रहे। कई लोगों ने बच्चों को पानी से बचाने के लिए गोद में उठाकर रास्ता पार कराया।

नेत्र रोग और ईएनटी के मरीजों में बड़ी संख्या बुजुर्गों की होती है। ऐसे मरीजों के लिए कमर तक पानी में चलकर विभाग तक पहुंचना बेहद कठिन रहा। वहीं गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर के जरिए ले जाना भी संभव नहीं हो पा रहा था।

अस्पताल परिसर में जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल

सर सुंदरलाल अस्पताल पूर्वांचल के साथ-साथ आसपास के कई जिलों के मरीजों के लिए बड़ी चिकित्सा सुविधा है। यहां प्रतिदिन हजारों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में बारिश के बाद अस्पताल परिसर में इस स्तर का जलभराव स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बन गया है।

मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल परिसर में जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था जरूरी है। बारिश के दौरान यदि मुख्य रास्ते ही पानी में डूब जाएंगे तो गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो सकता है। मंगलवार को भी अस्पताल पहुंचे कई मरीजों को जलभराव के कारण वापस लौटना पड़ा।

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