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राजगद्दी के बाद खुले दक्षिणमुखी काले हनुमान मंदिर के कपाट: साल में एक दिन खुलता है, दर्शन के लिए पहुंचे दूर-दराज के श्रद्धालु

चीफ एडिटर – अमर नाथ साहू
मण्डल ब्यूरो – रोहित गुप्ता

रामनगर की रामलीला में राजगद्दी की लीला संपन्न होने के बाद काले हनुमान मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। रामनगर किले के दक्षिणी छोर पर स्थित मंदिर के बाहर सुबह से ही भक्त कतार में खड़े रहे।

सुबह 9 बजे के बाद मंदिर के द्वार खुलने पर श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। साल में एक बार खुलने वाले इस मंदिर में दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं। किले में स्थित दक्षिणमुखी काले हनुमान की प्रतिमा के दर्शन को श्रद्धालु खास मानते हैं। रामलीला की राजगद्दी के दिन मंदिर खुलने की परंपरा के चलते यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

राजगद्दी के दिन साल में एक बार दर्शन

रामनगर की रामलीला के अंतिम दिन राजगद्दी की लीला संपन्न होने के बाद रामनगर किले में काले हनुमान मंदिर के द्वार खोले जाते हैं। सुबह 9 बजे के बाद श्रद्धालुओं को दर्शन का मौका मिला। मंदिर के बाहर लंबी कतारें लगी रहीं। भक्त बारी-बारी से मंदिर में पहुंचकर दर्शन करते रहे।

किला प्रशासन के अनुसार, किले के दक्षिणी यानी गंगा की ओर वाले छोर पर काले हनुमान की प्रतिमा स्थापित है। मान्यता के चलते इस प्रतिमा के दर्शन साल में एक बार कराए जाते हैं। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु इस दिन दर्शन को विशेष मानते हैं।

खुदाई के दौरान मिली थी प्रतिमा

किला प्रशासन के मुताबिक, कई वर्ष पहले मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान हनुमान जी की प्रतिमा मिली थी। इसके बाद किले के दक्षिणी छोर पर मंदिर बनवाकर प्रतिमा स्थापित कराई गई। प्रतिमा दक्षिणमुखी है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा है। इसके त्रेता युग से जुड़े होने की बात भी कही जाती है, हालांकि इसकी ऐतिहासिक पुष्टि के लिए स्वतंत्र प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

श्रीराम के बाण से काला हुआ रंग, ऐसी है मान्यता

काले हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर एक धार्मिक कथा प्रचलित है। मान्यता के अनुसार, जब भगवान श्रीराम माता सीता को लाने के लिए समुद्र पार जाने की तैयारी कर रहे थे, तब उन्होंने समुद्र से रास्ता देने की प्रार्थना की। समुद्र के रास्ता नहीं देने पर श्रीराम ने उसे सुखाने के लिए धनुष पर बाण चढ़ाया।

कथा के अनुसार, समुद्र के क्षमा मांगने के बाद भी श्रीराम के लिए बाण वापस लेना संभव नहीं था। तब उन्होंने बाण को धरती की ओर छोड़ा। धरती को नुकसान से बचाने के लिए हनुमान जी ने बाण का तेज अपने ऊपर ले लिया, जिससे उनका रंग काला पड़ गया। इसी मान्यता के चलते श्रद्धालु काले हनुमान जी की प्रतिमा के दर्शन को विशेष महत्व देते हैं।

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