चीफ एडिटर – अमर नाथ साहू
यूपी हेड – अजय लखमानी

काशी से नई दिल्ली के बीच प्रस्तावित वंदेभारत स्लीपर ट्रेन में भोजन को लेकर मांग उठी है। धार्मिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने इसमें केवल शाकाहारी भोजन परोसने की अपील की है। यह मांग वाराणसी से संचालित होने वाली सभी ट्रेनों के लिए भी उठाई गई है।
संस्कृति संसद के मंच से गोविंद शर्मा ने संतों से चर्चा और उनकी सहमति के बाद रेल मंत्रालय से यह मांग करने की बात कही। उनका कहना है कि धार्मिक नगरी काशी से चलने वाली ट्रेनों में खानपान की व्यवस्था स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को ध्यान में रखकर होनी चाहिए।
इस मुद्दे पर अयोध्या और वैष्णो देवी रूट की वंदेभारत ट्रेनों का उदाहरण दिया जा रहा है। मांग उठाने वालों का कहना है कि इन रूटों पर केवल शाकाहारी भोजन मिलता है तो काशी से चलने वाली ट्रेनों में भी ऐसी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

धार्मिक आस्था के अनुरूप भोजन की मांग
काशी के धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों का मानना है कि धार्मिक नगरों को जोड़ने वाली ट्रेनों में खानपान की व्यवस्था स्थानीय परंपराओं और आस्था को ध्यान में रखकर तय की जानी चाहिए। इसी आधार पर वाराणसी से संचालित होने वाली वंदेभारत ट्रेनों में मांसाहारी भोजन बंद करने की मांग उठाई गई है।
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा कि अयोध्या और वैष्णो देवी रूट की वंदेभारत ट्रेनों में मांसाहारी भोजन नहीं परोसा जाता है। ऐसे में काशी से चलने वाली ट्रेन में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
31 अक्टूबर से संचालन की चर्चा
वाराणसी और नई दिल्ली के बीच सप्ताह में छह दिन वंदेभारत स्लीपर ट्रेन चलने की चर्चा है। इसी के साथ ट्रेन में यात्रियों को परोसे जाने वाले भोजन को लेकर बहस शुरू हुई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में ट्रेन के संचालन और भोजन की व्यवस्था की आधिकारिक पुष्टि नहीं दी गई है।



