चीफ़ एडिटर – अमर नाथ साहू
ब्यूरो चीफ़ – प्रदीप साह

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के बिरला छात्रावास में शनिवार रात करीब 2 बजे जांच की गई। विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम की ओर से की गई जांच को लेकर छात्रों में नाराजगी है। छात्रों का आरोप है कि उेर रात दर्जनों की संख्या में प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्य और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े लोग हॉस्टल परिसर में पहुंचे और कमरों में सो रहे छात्रों को जगाकर जांच-पड़ताल की।
छात्रों ने इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए इसे उनकी निजता में हस्तक्षेप करार दिया है। छात्रों का कहना है कि हॉस्टल में किसी तरह की जांच या निरीक्षण करना है तो इसके लिए दिन का समय निर्धारित किया जाना चाहिए। देर रात जब अधिकांश छात्र अपने कमरों में सो रहे थे, उस समय बड़ी संख्या में अधिकारियों और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों के हॉस्टल में पहुंचने से अफरा-तफरी की स्थिति बनी।
आरोप है कि टीम ने कई कमरों में जाकर छात्रों को नींद से जगाया और उनसे पूछताछ की। छात्रों का कहना है कि इस दौरान उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया गया।
हॉस्टल की बदहाल व्यवस्था को लेकर उठाई थी आवाज
छात्रों ने आरोप लगाया कि पिछले दिनों बिरला ए हॉस्टल की अव्यवस्थाओं को लेकर उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अपनी आवाज उठाई थी। छात्रों के मुताबिक हॉस्टल में व्यवस्थाओं को बेहतर करने की मांग को लेकर उन्होंने विरोध जताया था। इसी के बाद देर रात जांच की कार्रवाई को लेकर उन्हें संदेह है कि कहीं यह कार्रवाई छात्रों की आवाज दबाने के उद्देश्य से तो नहीं की गई।

छात्रों का आरोप है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन को हॉस्टल में जांच करनी थी तो दिन के समय भी यह कार्रवाई की जा सकती थी। रात करीब दो बजे जांच टीम भेजना छात्रों पर दबाव बनाने जैसा है।
छात्रों ने कार्रवाई की मांग की
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने और देर रात हॉस्टल में पहुंचकर छात्रों को परेशान करने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।
छात्रों का कहना है कि हॉस्टल छात्रों के रहने और पढ़ाई करने की जगह है और वहां निरीक्षण या जांच की भी एक निर्धारित प्रक्रिया होनी चाहिए। रात में छात्रों की नींद में खलल डालना और बिना स्पष्ट वजह पूछताछ करना छात्र हित में नहीं है।
प्रॉक्टर ने कहा- कार्रवाई की गई है
वहीं, इस मामले में विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर संदीप पोखरिया से व्हाट्सएप पर कार्रवाई के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब “हां” था हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह कार्रवाई किस लिए थी और कार्रवाई में क्या कुछ निकल कर सामने आया।




