चीफ़ एडिटर – अमर नाथ साहू
डिस्ट्रिक रिपोर्टर – धनेश बदलानी

भाजपा सांसद और भोजपुरी अभिनेता-गायक मनोज तिवारी के बड़े भाई साधु शरण तिवारी का शनिवार को निधन हो गया। उन्होंने नई दिल्ली स्थित एम्स में दोपहर 1:15 बजे आखिरी सांस ली। परिवार में प्यार से ‘साधु भैया’ कहे जाने वाले साधु शरण चार भाइयों और एक बहन में सबसे बड़े थे। रविवार शाम 5 बजे वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। भाई की अंतिम यात्रा में मनोज तिवारी भी पैदल चले।
साधु शरण तिवारी ओएनजीसी में महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने कोलकाता, असम के नाजीरा-शिवसागर और मुंबई समेत कई जगहों पर सेवाएं दीं। रिटायरमेंट के बाद वह वाराणसी के चितईपुर स्थित आवास पर रह रहे थे। मनोज तिवारी ने अपने बड़े भाई को परिवार का अभिभावक और अपना प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि उनके गायन करियर को आगे बढ़ाने में साधु शरण की अहम भूमिका रही।
IIT-BHU से इंजीनियरिंग, ONGC में GM तक का सफर
साधु शरण तिवारी पढ़ाई में भी काफी अच्छे थे। उन्होंने आईआईटी बीएचयू से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इसके बाद तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) में नौकरी शुरू की।
नौकरी के दौरान उन्होंने कोलकाता, असम के नाजीरा-शिवसागर और मुंबई समेत अलग-अलग जगहों पर काम किया। लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद वह महाप्रबंधक (जीएम) के पद से रिटायर हुए।
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने वाराणसी को अपना ठिकाना बनाया और चितईपुर स्थित घर में रहने लगे।
मनोज तिवारी बोले- बड़े ईश्वर के समान थे

मनोज तिवारी ने बड़े भाई को परिवार का अभिभावक और मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि साधु शरण उनके लिए ईश्वर के समान थे। परिवार में भी उनका स्थान सबसे बड़े सदस्य और मार्गदर्शक के तौर पर था।
मनोज तिवारी के संगीत के सफर में भी उनका बड़ा योगदान रहा। उन्होंने छोटे भाई को गायन के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और हर कदम पर मार्गदर्शन दिया। मनोज तिवारी के मुताबिक, साधु शरण ने उन्हें सफलता की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
आखिरी मुलाकात में सुनाई थी कविता
मनोज तिवारी ने बड़े भाई के साथ हुई अपनी आखिरी मुलाकात को भी याद किया। उन्होंने बताया कि साधु शरण का स्वभाव ऐसा था कि हर मुलाकात में वह उन्हें कुछ न कुछ समझाते थे। आखिरी मुलाकात में भी उन्होंने मनोज तिवारी को एक कविता सुनाई थी। उस वक्त सांसद को जरा भी अंदाजा नहीं था कि भाई के साथ यह उनकी आखिरी मुलाकात होगी।
मणिकर्णिका घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
शनिवार को दिल्ली के एम्स में निधन के बाद साधु शरण तिवारी का पार्थिव शरीर वाराणसी लाया गया। रविवार शाम करीब 5 बजे मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम यात्रा में परिवार के लोगों और करीबियों के साथ मनोज तिवारी भी शामिल हुए। सांसद अपने बड़े भाई की अंतिम यात्रा में पैदल चले। इस दौरान परिवार और परिचितों के बीच शोक का माहौल रहा।




