चीफ़ एडिटर – अमर नाथ साहू
यूपी हेड – अजय लखमानी

वाराणसी में गंगा के जलस्तर में धीमी गति से बढ़ाव का सिलसिला जारी है। रविवार सुबह शहर में आसमान में बादल छाए रहे। तापमान 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि हवा दो किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली।
आर्द्रता 78 प्रतिशत रही। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक हल्के बादल छाए रहने के साथ बूंदाबांदी की संभावना है। मौसम में बदलाव के बीच गंगा और वरुणा के बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
गंगा में बढ़ाव का ट्रेंड, अभी खतरे के निशान से दूर
गंगा में जलस्तर करीब 0.5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर से 1.062 मीटर नीचे और खतरे के निशान 71.262 मीटर से करीब दो मीटर नीचे है।
आयोग के मुताबिक प्रयागराज और मिर्जापुर में गंगा के जलस्तर के रुख का असर वाराणसी में भी दिखाई देगा। फिलहाल गंगा में बढ़ाव का ट्रेंड बना हुआ है।
घाटों की सीढ़ियां एक-एक कर जलमग्न

गंगा का जलस्तर भले ही धीमी गति से बढ़ रहा हो, लेकिन इसका असर घाटों पर साफ दिखाई देने लगा है। ऊंचाई वाले प्रमुख घाटों की सीढ़ियां भी एक-एक कर पानी में डूब रही हैं। अस्सी घाट पर सुबह ए-बनारस का मंच पूरी तरह जलमग्न हो गया।
मंच के भीतर बने प्लेटफार्म तक पहुंचने के लिए अब नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। पुराने अस्सी घाट से पानी सड़क की ओर भी बढ़ रहा है।
गंगा में लगातार बढ़ाव को देखते हुए नमो घाट पर आम लोगों के आवागमन पर भी कभी भी रोक लगाई जा सकती है। घाटों पर बाढ़ का पानी देखने और सेल्फी लेने वालों की भीड़ बढ़ने के कारण पुलिस ने सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी है।
छत पर हो रही गंगा आरती
जलस्तर बढ़ने का असर धार्मिक गतिविधियों पर भी पड़ा है। दशाश्वमेध घाट की दैनिक सांध्य गंगा आरती अब घाट की बजाय छत पर कराई जा रही है। श्रद्धालु और पर्यटक आसपास की गलियों में खड़े होकर आरती का दर्शन कर रहे हैं। घाटों के लगातार जलमग्न होने से सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
जल पुलिस चौकी में घुसा पानी
दशाश्वमेध घाट स्थित जल पुलिस चौकी में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। इसके बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पास के मानमंदिर घाट पर अस्थायी चौकी स्थापित कर दी है। प्रशासन और पुलिस की ओर से नदी किनारे के इलाकों में लगातार निगरानी की जा रही है।
वरुणा के पलट प्रवाह से बढ़ी परेशानी
गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ पलट प्रवाह के कारण वरुणा नदी का पानी भी आसपास के इलाकों में फैल रहा है। वरुणा किनारे के सैकड़ों मकानों में बाढ़ का पानी घुस गया है। लोग अपने जरूरी सामान को पहली मंजिल पर रखकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। कुछ परिवारों ने सामान सुरक्षित रखने के लिए ऊंचे स्थानों पर रहने वाले रिश्तेदारों के घरों का सहारा लिया है।

सलारपुर की चमेलिया बस्ती, डिपो कॉलोनी और सलारपुर नाला के आसपास भी बाढ़ का पानी घरों में पहुंच गया है। शनिवार को बाढ़ प्रभावित इलाके के करीब 16 परिवारों के 61 सदस्य राहत शिविर में पहुंच गए।
धान और सब्जियों की फसल पर खतरा
रोहनिया क्षेत्र के बेटावर में नाले के रास्ते बाढ़ का पानी गांव के निचले हिस्से और करसड़ा कूड़ा प्लांट के पूर्वी छोर तक पहुंचने लगा है। फिलहाल फसलों को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन ग्रामीणों को आशंका है कि पानी एक-दो फीट और बढ़ा तो धान की फसल के साथ सब्जियों को भी नुकसान हो सकता है।



