चीफ़ एडिटर – अमर नाथ शाहू
रिपोर्ट: सत्यम गुप्ता

वाराणसी साइबर क्राइम टीम ने ट्रेडिंग के बहाने कॉलिंग करके साइबर ठगी करने वाले कॉल सेंटर पर छापेमारी की। साइबर क्राइम ब्रांच के दरोगा और सिपाही खुद ट्रेडर बायर बनकर पहुंचे, पूरे जाल और पैटर्न को समझा फिर 10 करोड़ इनवेस्ट करने की फाइल तैयार करवा ली ।
ट्रैडिंग के ट्रैप में आई युवतियों ने फॉर्म भी भरवा लिया और फर्जी कॉलिंग नंबर भी शेयर कर दिए, इसके बाद टीम ने पूरा माहौल और अधिक आरोपियों पर एक्शन के लिए फोर्स बुला ली।
ट्रैडिंग कॉल करने वाले गैंग के 32 कॉलर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इसमें 21 युवतियां शामिल हैं। मौके से कंपनी मैनेजर और उसके साथियों को गिरफ्तार कर कंप्यूटर, लैपटॉप और डेटा बरामद किया है। वाराणसी में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर क्राइम टीम और स्थानीय पुलिस ने भेलूपुर थाना क्षेत्र के महमूरगंज स्थित शाही टावर में संचालित एक संदिग्ध कॉल सेंटर पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 21 युवतियों और 11 युवकों समेत कुल 32 लोगों को हिरासत में लिया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जी ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर कार्यालय बना रखा था। यहां से ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश (इन्वेस्टमेंट) और डिजिटल मार्केटिंग के नाम पर लोगों को झांसा देकर ठगी की जा रही थी। पुलिस के अनुसार गिरोह भारत ही नहीं, बल्कि विदेशी नागरिकों को भी अपना निशाना बनाता था।
जांच में यह भी पता चला कि कॉल सेंटर में कार्यरत लोग खुद को एक मल्टीनेशनल कंपनी का एजेंट बताकर लोगों का विश्वास जीतते थे और उन्हें अधिक मुनाफे का लालच देकर निवेश के लिए प्रेरित करते थे। इसके बाद विभिन्न माध्यमों से उनसे बड़ी रकम की ठगी की जाती थी।
साइबर पुलिस ने पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की। टीम के अधिकारियों ने पहले ट्रेडर बनकर गिरोह से संपर्क किया और पर्याप्त जानकारी जुटाने के बाद कॉल सेंटर पर छापा मारा।
मौके से महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर सिस्टम, डिजिटल डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए गए हैं। फिलहाल पुलिस हिरासत में लिए गए सभी लोगों से पूछताछ कर रही है।
गुरुवार रात 9 बजे छापेमारी से हड़कंप मच गया। जांच में पता चला कि ये जालसाज ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश, डिजिटल मार्केटिंग और खरीदार (बायर्स) उपलब्ध कराने के नाम पर व्यापारियों से संपर्क करते थे। व्यापारियों का भरोसा जीतने के लिए उन्हें फर्जी सर्टिफिकेट और दस्तावेज भी दिखाए जाते थे।
कॉलर खुद को मल्टीनेशनल कंपनी का अधिकृत एजेंट बताते थे। केवल भातीय ही नहीं अमेरिकी नागरिकों को फर्जी एप्पल और कस्टमर सपोर्ट बनकर शिकार बनाते थे और करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे थे।
कंप्यूटर, लैपटॉप और डेटा बरामद करके जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि ठगी के नेटवर्क, लेन-देन और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई के दौरान साइबर क्राइम टीम ने आला अधिकारियों को सूचना दी। मौके पर एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार, इंस्पेक्टर भेलूपुर 2 थाना क्षेत्र की फोर्स, QRT टीम मौके पर रही ।



