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लापरवाहीः रसड़ा में ई-रिक्शा की कमान नाबालिगों के हाथ में, हादसे की आशंका, पुलिस मौन

ब्यूरो रिपोर्ट : रवि प्रताप आर्य

बलिया। स्वयं और अन्य लोगों की जान खतरे में डाल कर रसड़ा बाजार सहित आसपास के मुख्य मार्गों पर नाबालिग ई-रिक्शा सवारी ढो रहे हैं। इसके चलते उसमें बैठे सवारी और सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों की जान खतरे में रहती है। ये नाबालिग कब कहां से ई-रिक्शा घुमा दें किसी को नहीं पता होता है। यही कारण है कि रसड़ा कस्बा में आए दिन कोई न कोई टकराकर घायल हो रहा है।
आपको बताते चलें कि स्थानीय पुलिस कभी कभी अभियान तो चलाती है, लेकिन फिर कुछ दिन बाद नाबालिग सड़कों पर उतर जाते हैं। रसड़ा में बच्चों को ई-रिक्शा चलाते देख हर कोई तरह -तरह की चर्चाएं कर रहा है।


गौरतलब हो कि शहर में फर्राटा भरने वाले अधिकांश ई-रिक्शा की कमान नाबालिगों के हाथ में दिखाई दे रही है। बिना लाइसेंस के यह चालक इस हल्के वाहन को तेज रफ्तार में दौड़ा रहे हैं। इससे लोगों की जान पर खतरा बना हुआ है। नाबालिगों के हाथों में स्टेयरिंग होने से शहर में ई-रिक्शा पलटने की कई घटनाएं भी ही चुकी हैं।
यह चालक बिना इंडीकेटर जलाए ही अचानक वाहनों को जहां – तहाँ मोड़ दे रहे हैं, वहीं सवारियों के आवाज लगाने पर अचानक सड़क पर ही वाहन का ब्रेक लगा दे रहे हैं, जिससे पीछे और सामने से आने वाले वाहनों से टकराने का भय बना रह रहा है। इस वाहन की हालत यह है कि यह काफी हल्का है। तेज रफ्तार चलने के दौरान अगर छोटे गड्ढे में भी इसका पहिया चला गया तो वाहन पलटने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।

क्षमता से अधिक ढो रहे यात्री

ई-रिक्शा वाले क्षमता से अधिक सवारी ढो रहे हैं। ड्राइवर सीट के पास दोनों ओर यात्री बैठाए जा रहे हैं। ऑटो की तर्ज पर कुछ यात्री तो ई-रिक्शा पर खड़ा होकर यात्रा करते देखे जाते हैं। कुछ ई-रिक्शा वाले तो यात्रियों की जगह माल भी ढोने लगे हैं। मसलन सब्जियों के गट्ठर, इलेक्ट्रॉनिक व अन्य सामग्री लोड कर गंतव्य स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। सवारी या माल अधिक होने पर खतरे की आशंका बढ़ जाती है। लेकिन, कमाई के फेर में जान जोखिम में डाल रहे हैं।

जहाँ इच्छा होती वहीं लगा देते हैं ब्रेक

रसड़ा नगर पालिका परिषद भी ई रिक्शा चालकों की मनमानी में चार चांद लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ा है। शहर में नगर परिषद द्वारा न तो कहीं कोई स्टैंड बनवाया गया है और न ही रूट – किराया निर्धारण किया गया। इस संबंध में रसड़ा व्यापार कल्याण समिति के संरक्षक सुरेश चंद जायसवाल ने कई बार रसड़ा नगर पालिका को शिकायती मांग पत्र सौंपा लेकिन आदर्श नगर पालिका परिषद द्वारा कोई संतोषजनक कार्य नहीं किया गया बल्कि पत्रक को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। ई-रिक्शा वालों को जब जहां यात्री दिख जाएं वहीं ब्रेक लगा देते हैं। जो यात्री जहां उतरना चाहे, वहीं रोक देते हैं। कभी-कभी तो बीच सड़क पर भी इनका ई-रिक्शा खड़ा हो जाता है। इससे हादसे की आशंका बनी रह रही है। ई-रिक्शा के डिवाइडर से टकराने, पलटने, किसी वाहन के द्वारा पीछे से धक्का मार देने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं।

बिना नंबर प्लेट के दौड़ रहे हैं ई रिक्शा

ट्रांसपोर्ट विभाग की गलत नीतियों से इन दिनों ई-रिक्शा डीलर सरकार को रेवेन्यू नुकसान पहुंचा रहे हैं। इन डीलरों द्वारा नियमों को ताक पर रख बिना रजिस्ट्रेशन नंबर जारी किए ई-रिक्शा बेचे जा रहे हैं। ऐसा करने से जहां पर सरकारी खजाने को नुकसान हो रहा है। वहीं, पर यह बिना नंबर वाले ई रिक्शा सुरक्षा के मद्देनज़र भी काफी खतरनाक साबित हो सकते हैं।
इन सब पर नकेल कसने को अब ट्रैफिक पुलिस को ही सख्ती बरतने की जिम्मेदारी मिली है। क्योंकि, बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के ई रिक्शा की गिनती दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। जिस पर किसी भी तरह की कार्रवाई करने के लिए ट्रांसपोर्ट विभाग दिलचस्पी तक नहीं दिखा रहा है।

कमाई के फेर में दुर्घटनाओं को आमंत्रण

मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत कोई भी 18 वर्ष से कम उम्र का व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर वाहन नहीं चला सकता। लेकिन, यहां तो कमाई के फेर में 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिग भी ई-रिक्शा चला रहे हैं। ऐसे चालकों की छानबीन नहीं किए जाने से परिवहन नियमों की धज्जियां उड़ रही है।

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