चीफ़ एडिटर – अमर नाथ साहू
डिस्ट्रिक ब्यूरो – राकेश वलेचा

वाराणसी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा छात्र अधिष्ठाता प्रेक्षागृह में सामाजिक न्याय के प्रखर पुरोधा एवं मंडल आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय बी. पी. मंडल की जयंती सामाजिक न्याय, समान अवसर और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के संकल्प के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने बी. पी. मंडल के सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान को याद करते हुए उनके विचारों को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताया।
वक्ताओं ने कहा कि बी. पी. मंडल ने राजनीति को केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम न मानकर सामाजिक बराबरी, वंचितों के अधिकार और समान प्रतिनिधित्व का माध्यम बनाया।
मंडल आयोग की सिफारिशों ने देश में सामाजिक प्रतिनिधित्व और भागीदारी को लेकर व्यापक बहस को जन्म दिया तथा पिछड़े और वंचित वर्गों के अधिकारों की आवाज को मजबूती प्रदान की।
हिंदी विभाग की डॉ. प्रियंका सोनकर ने कहा कि ओबीसी, एससी, एसटी एवं अल्पसंख्यक समुदायों को बहुजन समाज के रूप में एकजुट होकर अपने राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक प्रतिनिधित्व के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत और पहचान को मजबूत करने की आवश्यकता है।
जातिगत भेदभाव और सामाजिक वर्चस्व पर विचार जरूरी
विधि संकाय के डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में विश्वविद्यालयों, शहरों और ग्रामीण समाज में राजनीतिक एवं आर्थिक प्रभुत्व के लिए मौजूद जातिगत भेदभाव की स्थिति को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भाषा, संस्कृति और धार्मिक प्रतीकों के माध्यम से वर्चस्व कायम करने की प्रवृत्तियों पर सामाजिक चेतना के साथ विचार किया जाना चाहिए।
आईआईटी-बीएचयू के डॉ. केशव प्रसाद ने कहा कि बी. पी. मंडल का सपना समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे बढ़ने का समान अवसर दिलाना था। आज आवश्यकता है कि उनकी विचारधारा और सामाजिक न्याय के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए।
सामाजिक संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प
वक्ताओं ने कहा कि आज बी. पी. मंडल को याद करने का अर्थ केवल उनकी जयंती मनाना नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, सत्ता में भागीदारी, सामाजिक सम्मान और समान अवसर के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाना है। कार्यक्रम में संकल्प लिया गया कि समाज के प्रत्येक वंचित वर्ग को बराबरी का अधिकार और अवसर दिलाने के लिए लोकतांत्रिक एवं सामाजिक संघर्ष जारी रहेगा।




