चीफ एडिटर – अमर नाथ साहू
रिपोर्ट – अभिषेक सोनकर

काशी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार सुबह काशी में बढ़ते पानी और बाढ़ के हालात का जायजा लिया। पीएम ने जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार और मेयर अशोक तिवारी को फोन कर बनारस की वर्तमान स्थिति जानी।
पीएम ने शहर में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले इलाकों के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही बाढ़ की दशा में राहत एवं बचाव कार्य की तैयारियों का ब्लूप्रिंट भी पूछा। 10 मिनट की कॉल में शहर की स्थिति पर विस्तृत जानकारी ली।
उन्होंने जिलाधिकारी से नदी के जल स्तर के साथ ही राहत कैम्पों में प्रदान की जा रही जा रही व्यवस्थाओं को भी पूछा। बताया कि बाढ़ से प्रभावित लोगों के राहत के लिए युद्धस्तर पर कार्य करते हुए उन्हें समस्त तत्काल आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित रहे।
जहां राहत सामग्री की अतिरिक्त आवश्यकता हो वहां तत्काल व्यवस्था करते हुए लोगों को राहत पहुंचाने का कार्य त्वरित गति किया जाय। प्रधानमंत्री ने बाढ़ और राहत कार्यों पर लगातार सतर्क नजर रखने एवं प्रभावित जनों को अविलंब राहत पहुंचाने के निर्देश दिए।
डीएम ने बताया कि वाराणसी में गंगा का जलस्तर 70.29 मीटर दर्ज किया गया, जबकि चेतावनी का स्तर 70.26 मीटर है. यानी पानी चेतावनी निशान से ऊपर पहुंच गया है। गंगा के बढ़ते जलस्तर के चलते नौका संचालन रोक दिया गया है।
प्रधानमंत्री को बताया गया कि प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है, इसके लिए 24 घंटे टीमें लगाई गई हैं। जलस्तर में बढ़ोतरी, जलभराव और वरुणा नदी के आसपास के इलाकों में पानी की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
मेयर से बोले पीएम मोदी-राहत शिविरों पर फोकस करें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को महापौर अशोक कुमार तिवारी से टेलीफोन पर वार्ता कर राहत कार्यों और बाढ़ राहत शिविरों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने शहर के विभिन्न इलाकों में जलभराव और गंगा के बढ़ते जलस्तर से उत्पन्न परिस्थितियों की गहन समीक्षा की।
उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बनाए गए राहत शिविरों के संचालन पर विशेष जोर देते हुए मेयर पर इन राहत शिविरों में बेहतर इंतजाम पर फोकस करने की बात कही। महापौर से शिविरों में रह रहे लोगों के लिए खाद्य सामग्री, पेयजल, दवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में भी पूछा।
पीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राहत शिविरों में शरण लिए नागरिकों को किसी भी तरह की असुविधा न हो और सभी मूलभूत सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। सभी जनप्रतिनिधि और नगर निगम के पार्षद आपसी समन्वय के साथ धरातल पर कार्य करें।



