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ईरानी गैंग को प्रयागराज छोड़ने वाला टैक्सी ड्राइवर गिरफ्तार: 27 किलो चांदी की लूट मामले में था वांछित, 7 किलो चांदी बरामद

चीफ़ एडिटर – अमर नाथ साहू
यूपी हेड – अजय लखमानी

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वाराणसी में 16 जुलाई को हुई 27 किलो चांदी की लूट मामले में पुलिस ने तीसरे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी प्रशांत जेवियर टिर्की कार ड्राइवर है और इसने ही अपनी कार से शब्बीर, मसल्लाह, हफीज और जुल्फेकार को प्रयागराज से बनारस और फिर बनारस से प्रयागराज छोड़ा था।
इसके पास से पुलिस ने 6.958 किलो चांदी बरामद की है। पुलिस ने बताया की इसे पता था की ये सभी लूट करने आये हैं और लूट कर जा रहे हैं। ऐसे में इसे भी संबंधित धराओं में जेल भेजा जा रहा है। प्रशांत पूर्व में भी तीन बार जेल जा चुका है।

वाराणसी से प्रयागराज तक किए गए सीसीटीवी कैमरे चेक

डीसीपी काशी जोन गौरव बंसवाल ने बताया – 16 जुलाई को हुई लूट मामले में पुलिस ने लगभग 300 से अधिक सीसीटीवी फुटेज वाराणसी से प्रयागराज तक देखे और टोल प्लाजा के भी फुटेज चेक किए।

जिसके बाद ईरानी गैंग का नाम सामने आया और दो लोगों गिरफ्तार कर उनके पास से 4 किलो चांदी और घटना में प्रयुक्त बलेनो कार बरामद की गई थी। इसके बाद बलेनो ड्राइवर प्रशांत की तलाश तेज की गई थी।

झारखंड का रहने वाला है प्रशांत

डीसीपी ने बताया – इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली थी की प्रशांत माल गोदाम, इंग्लिशिया लाइन पर मौजूद है। ऐसे में चौक पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
उसके पास से कुल 6.958 किलो चांदी बरामद हुई है। प्रशांत जेवियर टर्की लातेहर, झारखंड का रहने वाला है। और पूर्व में तीन मामलों में जेल जा चुका है। फिलहाल पूछताछ के बाद उसे जेल भेजा जा रहा है।

क्राइम ब्रांच का अफसर बनकर की थी लूट

वाराणसी की आभूषण मंडी सुड़िया में हेमा ज्वेलर्स नाम से शॉप चलाने वाले विनय सोनी ने बताया- 16 जुलाई शाम 7 बजे मेरा कर्मचारी 27 किलो 327 ग्राम चांदी लेकर रेशम कटरा स्थित महालक्ष्मी ज्वेलर्स जा रहा था। चांदी 26 पीस में एक झोले में रखी थी। रेशम के साथ महालक्ष्मी ज्वेलर्स का एक कर्मचारी भी था।

बाइक से दोनों गोविंदपुरा मोड़ पहुंचे थे। तभी दो अज्ञात बाइक सवारों ने उन्हें रोक लिया। खुद को क्राइम ब्रांच का अफसर बताते हुए हड़काया। पूछा-झोले में क्या है। इन्होंने बताया चांदी है, तो उन्होंने झोला ले लिया। कहा कि मालिक को बुलाकर क्राइम ब्रांच लेकर आओ। रेशम ने मौके से ही मुझे फोन किया।

मैं अपने अन्य कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचा। इसके बाद पुलिस थाने पहुंचा। वहां पूरी घटना बताई तो पता चला कि दोनों लुटेरे थे। क्राइम ब्रांच का फर्जी अफसर बनकर इन्होंने लूट की थी। इसके बाद लंका थाने में एफआईआर करवाई गई थी। इसके बाद से ही आरोपियों की तलाश की जा रही थी ।

पुलिस बनकर कारोबारियों को निशाना बनाता है ईरानी गैंग

पुलिस के मुताबिक, ईरानी गैंग के लोग खानाबदोश हैं। खुद को ईरानी कहते हैं। ज्यादातर यूपी, बिहार, एमपी और झारखंड में ऑपरेट करते हैं। चश्मा बेचने के कारोबार की आड़ में अपराधों को अंजाम देते हैं। इनकी लैंग्वेज भी आम भाषा से अलग है। न वो ईरानी है और न ही इराकी और न ही उर्दू। ऐसे में ये किसी अन्य के सामने आसानी से अपनी प्लानिंग को अंजाम दे देते हैं।

ईरानी गैंग का वारदात करने का तरीका अलग किस्म का है। यह गैंग पुलिसकर्मी, क्राइम ब्रांच, एसटीएफ बनकर ही लोगों, कारोबारियों को अपना शिकार बनाता है। गैंग के सरगना अनुज डेहरा और मेहंदी हसन के इशारे पर बदमाश कई राज्यों में वारदात करते हैं। लूट के जेवर को बेचने के बाद गिरोह के बदमाश दूसरे राज्य या शहरों में फरार हो जाते हैं।
इस गैंग का मुख्य गढ़ मध्य प्रदेश के भोपाल में ‘ईरानी डेरा’ माना जाता है, जहां से पूरे गैंग का नेटवर्क संचालित होता है। पुलिस के मुताबकि, वाराणसी में ईरानी गैंग इसके पहले भी वारदात को अंजाम दे चुका है। साल 2022 में 24 मार्च को कबीरचौरा-पियरी मार्ग पर गाजीपुर के कारोबारी से पुलिस चेकिंग के नाम पर गैंग ने 8 लाख रुपए से भरा बैग उड़ा लिया था।

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