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अनूप जलोटा और अनुराधा पौडवाल को मिलेगा रामायणी सम्मान समारोह: BHU ने 28 विभूतियों की सूची जारी की, रामायण जयंती पर जुटेंगे देश विदेश के कलाकार

चीफ़ एडिटर – अमर नाथ साहू
रिपोर्ट – अभिषेक सोनकर

रामायण रिसर्च काउंसिल की ओर से आयोजित होने वाले रामायणी सम्मान समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली 28 विभूतियों को सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन 19 अगस्त को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में भारतीय अध्ययन केंद्र के सहयोग से किया जाएगा।
सम्मान के लिए चुनी गई हस्तियों में प्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलोटा, लोकप्रिय गायिका अनुराधा पौडवाल, बिहार के आरके सिन्हा और काशी के डॉ. उदय प्रताप सिंह समेत कला, साहित्य, अध्यात्म, शिक्षा, समाजसेवा और भारतीय संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं।
250 से अधिक नामांकन के बाद 28 नामों पर लगी मुहर रामायणी सम्मान के लिए इस बार देशभर से बड़ी संख्या में नामांकन प्राप्त हुए। आयोजकों के मुताबिक, विभिन्न क्षेत्रों से 250 से अधिक नामांकन आए थे। इनमें रामायण, भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चिंतन, साहित्य, कला, शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के नाम शामिल थे।

रामायण रिसर्च काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अध्यक्ष अजय भट्ट के अनुसार, प्राप्त नामांकनों की निर्धारित प्रक्रिया के तहत समीक्षा और चयन के बाद 28 विभूतियों को सम्मान के लिए चुना गया है। चयनित व्यक्तित्वों ने अपने-अपने क्षेत्रों में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और आध्यात्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अनूप जलोटा और अनुराधा पौडवाल भी सम्मान सूची में इस वर्ष सम्मान पाने वाली प्रमुख हस्तियों में भजन गायक अनूप जलोटा और प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल शामिल हैं। दोनों कलाकारों ने भक्ति संगीत को व्यापक स्तर पर लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

अनूप जलोटा लंबे समय से भजन और आध्यात्मिक संगीत के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनके गायन के माध्यम से धार्मिक और आध्यात्मिक भावों को बड़ी संख्या में श्रोताओं तक पहुंच मिली है। वहीं अनुराधा पौडवाल ने भी भक्ति संगीत के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उनके भजनों और धार्मिक गीतों की लोकप्रियता देश के साथ-साथ विदेशों में भी रही है।

रामायण और भारतीय संस्कृति से जुड़े व्यापक योगदान को सम्मान

रामायणी सम्मान का दायरा केवल रामायण पर प्रत्यक्ष रूप से शोध या लेखन करने वाले लोगों तक सीमित नहीं रखा गया है। इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, साहित्य, कला और सामाजिक क्षेत्र में ऐसे योगदान को भी पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है, जिसने भारतीय ज्ञान और सांस्कृतिक परंपराओं को समृद्ध किया है।

सम्मान सूची में बिहार के आरके सिन्हा और काशी के डॉ. उदय प्रताप सिंह के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से चुनी गई 24 अन्य विभूतियां भी शामिल हैं। आयोजकों का कहना है कि चयनित लोगों ने अपने कार्यों के माध्यम से भारतीय मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक परंपराओं को समाज तक पहुंचाने में योगदान दिया है।

तुलसी जयंती के अवसर पर आयोजन का विशेष महत्व काशी में तुलसी जयंती के अवसर पर होने वाले इस आयोजन का धार्मिक और साहित्यिक दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व माना जा रहा है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के माध्यम से भगवान श्रीराम के चरित्र, आदर्शों और रामायण के संदेश को जनभाषा में समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाया।
रामायण रिसर्च काउंसिल का मानना है कि रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय समाज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण आधार भी है। इसके मूल्यों और संदेश को अलग-अलग माध्यमों से समाज तक पहुंचाने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित करने से भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति नई पीढ़ी की रुचि और समझ को भी बढ़ावा मिल सकता है।

बीएचयू में भारतीय ज्ञान परंपरा पर होगी चर्चा

19 अगस्त को बीएचयू परिसर में होने वाले समारोह के दौरान सम्मान प्रदान करने के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और अध्यात्म से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किए जाने की संभावना है। भारतीय अध्ययन केंद्र के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में रामायण के अध्ययन, शोध और समकालीन सांस्कृतिक संदर्भों पर चर्चा को भी स्थान मिलने की उम्मीद है।

आयोजकों के अनुसार, इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य रामायण से जुड़े शोध और विमर्श को व्यापक मंच उपलब्ध कराना है। साथ ही भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों पर गंभीर संवाद को आगे बढ़ाना भी आयोजन की प्रमुख भावना है।

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