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बैजलपुर हिंसा में पूर्व सैनिक की मौत, निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर इंस्पेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह की हो रही सराहना

संवाददाता : रवि प्रताप आर्य
(NEWS HACK 24)

बलिया। रसड़ा क्षेत्र के बैजलपुर गांव में दो वर्ष पुराने जमीनी विवाद एवं शौचालय की दीवार निर्माण को लेकर हुई मारपीट में गंभीर रूप से घायल पूर्व सैनिक हृदय नारायण सिंह की लखनऊ में इलाज के दौरान बृहस्पतिवार को मौत हो गई। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना रहा।

जानकारी के अनुसार, विवादित जमीन पर शौचालय की दीवार बनाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई, जिसके बाद मामला हिंसक हो गया। झड़प के दौरान लाठी-डंडों और धारदार हथियारों का इस्तेमाल हुआ, जिसमें हृदय नारायण सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

आपको बताते चलें कि इस प्रकरण में रसड़ा इंस्पेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह ने अपने बेहतर सूझबूझ और शानदार बुद्धिमता का परिचय देते हुए पीड़ित पक्ष अनिल सिंह के परिजनों की तहरीर के आधार पर मुकदमा पंजीकृत कर आवश्यक विधिक कार्यवाही शुरू कर दी थी।

वहीं, मारपीट में हल्के चोटिल संतोष सिंह ने अपने विरुद्ध कानूनी कार्यवाही को देखकर बौखला गया। ड्रामेबाज संतोष सिंह ने कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए अस्पताल में कुछ दलाल तथाकथित पत्रकारों को इकट्ठा कर बयानबाजी शुरू कर दी। कानूनी कार्यवाही एवं एफआईआर की प्रक्रिया को देखते हुए ड्रामेबाज संतोष सिंह ने रसड़ा इंस्पेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह पर 20 हजार रुपये रिश्वत मांगने का निराधार एवं बेबुनियाद आरोप लगाना शुरू कर दिया। इंस्पेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह की ईमानदार एवं कानूनी कार्यवाही से खुन्नस खाए कुछ दलाल पत्रकारों ने इस फर्जी आरोप को खूब हवा दी और उसे तूल पकड़ाया लेकिन कहते हैं न , “सांच को आंच कैसी?” इंस्पेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह पर फर्जी आरोप लगाए गए तथा सोशल मीडिया के फेसबुक, इंस्टाग्राम एवं व्हाट्सएप पर उन्हें खूब ट्रोल किया गया। इस दौरान इंस्पेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह ने अपनी दृढ़ता एवं धैर्यता का बखूबी परिचय दिया, जो उन्हें पुलिस ट्रेनिंग के दौरान सिखाया गया था।


उधर, संतोष सिंह द्वारा किए गए हमले में अधिक गंभीर रूप से घायल पूर्व सैनिक हृदय नारायण सिंह ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हृदय नारायण सिंह के मौत की सूचना मिलते ही ड्रामेबाज संतोष सिंह अस्पताल से फरार हो गया। पुलिस आरोपी संतोष सिंह की तलाश में जुटी हुई है। मृतक हृदय नारायण सिंह के परिजनों ने भी कहा कि इस प्रकरण में इंस्पेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह का कोई दोष नहीं है। वहीं, व्यापारियों एवं बुद्धिजीवी वर्ग में चर्चा है कि इंस्पेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह कार्यकुशल अधिकारी हैं। उन्होंने बिना किसी पक्षपात के कानून के दायरे में रहकर उचित एवं समुचित कार्यवाही की थी। घटना में जो वास्तविक रूप से घायल था, उसी की तहरीर के आधार पर मुकदमा पंजीकृत किया गया था। उनका कहना है कि जो बेहद नेक एवं ईमानदार अफसर होते हैं, उन पर ऐसे ही अनायास आरोप लगते रहते हैं। इंस्पेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह वास्तव में नेक पुलिस अफसर हैं।

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