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गंगा दशहरा पर काशी के दशाश्वमेध घाट पर महाआरती, 11 वैदिक ब्राह्मण-21 देवकन्या शामिल, अस्सी घाट पर 56 प्रकार का लगा भोग

चीफ एडिटर : अमर नाथ साहू
रिपोर्ट : अभिषेक सोनकर

वाराणसी। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर मंगलवार को काशी का पौराणिक दशाश्वमेध घाट और असिघाट पर भव्य रोशनी, दीपों और फूलों से सुसज्जित होकर स्वर्ग जैसा दिखाई दिया। गंगोत्री सेवा समिति एवं गंगा सेवा निधि द्वारा आयोजित भव्य गंगा महोत्सव में देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने हिस्सा लिया।

घाट पर “हर-हर गंगे” के जयघोष, शंखनाद, डमरू की गूंज और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। वही असि घाट पर माता को 56 प्रकार का भोग लगाया गया।

501 लीटर दूध से दुग्धाभिषेक

मां गंगा की अष्टधातु प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया गया। 501 लीटर दूध, फल, फूल और मिष्ठान से अभिषेक कर षोडशोपचार पूजन सम्पन्न हुआ। आयोजन में 11 वैदिक ब्राह्मणों ने मां गंगा की महाआरती उतारी, जबकि 21 कन्याओं ने रिद्धि-सिद्धि के रूप में चंवर डुलाकर मातृशक्ति का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। इस दौरान श्रद्धालुओं को “स्वच्छ गंगा, निर्मल गंगा” का संकल्प भी दिलाया गया।

11 हजार दीपों से जगमगाया गंगा घाट

गंगा सेवा निधि द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 11 हजार दीपों और 25 कुंतल फूलों से दशाश्वमेध घाट को सजाया गया। संस्था के अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने कहा कि गंगा आरती के माध्यम से पिछले नौ वर्षों से “एक संकल्प गंगा किनारे” अभियान चलाकर लोगों को गंगा, घाट और भारत को स्वच्छ रखने का संदेश दिया जा रहा है

विश्वनाथ मंदिर में हुआ विशेष पूजन

गंगा दशहरा पर्व के उपलक्ष्य में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा विविध धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन संपन्न किया गया। इस अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में विशेष पूजा-अर्चना एवं वैदिक अनुष्ठानों का आयोजन संपन्न हुआ। प्रातःकाल वेला में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के घाट पर माँ गंगा की विधिवत आरती के उपरांत मां गंगा का अभिषेक सम्पन्न किया गया, जिसके उपरांत धाम स्थित मंदिर परिसर में विराजमान मां गंगाजी के विग्रह पर विधिवत पूजन अर्चन संपन्न हुआ I

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