चीफ़ एडिटर – अमर नाथ साहू
यूपी हेड – अजय लखमानी

ज्ञान, आत्मशुद्धि और वेदों के स्वाध्याय का पवित्र आध्यात्मिक पर्व ‘श्रावणी उपाकर्म’ शुक्रवार को वाराणसी के सामने घाट स्थित पावन गंगा तट पर वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। श्री सीताराम हनुमत सेवा ट्रस्ट और मां कामाख्या ग्रामोत्थान ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अनुष्ठान का निर्देशन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य अर्चक पंडित नीरज पांडेय ने किया, जबकि आचार्यत्व की भूमिका पं. राहुल पांडेय ने निभाई।
अनुष्ठान की शुरुआत महासंकल्प (हिमाद्रि संकल्प) से हुई, जिसमें विद्वानों ने अब तक जाने-अनजाने में हुए सभी प्रकार के दोषों के शमन और प्रायश्चित का संकल्प लिया। इसके बाद वैदिक परंपरा का निर्वहन करते हुए अपामार्ग, पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोमूत्र, गोबर), भस्म और दूर्वा आदि से स्नान किया गया।
गंगा में खड़े होकर गायत्री जप और नया जनेऊ
शुद्ध गंगा स्नान के पश्चात सभी भूदेवों ने नाभि तक जल में खड़े होकर परम पवित्र गायत्री मंत्र का जप किया। इसके साथ ही, पुराने जनेऊ को उतारकर विधि-विधान से नया यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण किया गया, जो जीवन में नई ऊर्जा, पवित्रता और संकल्प का प्रतीक है। ब्राह्मण समाज के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक अनुष्ठान माना जाता है, जिसे पूर्ण कर वे स्वयं को परम पवित्र मानते हैं।

उमड़ा विद्वानों का हुजूम
इस पावन अवसर पर पं. अमरनाथ उपाध्याय, पं. विश्वकांताचार्य, संदीप शास्त्री, राकेश शास्त्री, अनिल, विक्रम नारायण तिवारी, पप्पू तिवारी, राकेश पांडेय, सचिन, अर्पित भारती, शाश्वत सावर्णय, प्रणव पांडेय, प्रमोद पाठक, शंभूनाथ उपाध्याय, डॉ. मनोज त्रिपाठी, रमेश तिवारी और अनमोल त्रिपाठी सहित भारी संख्या में विद्वान और श्रद्धालु उपस्थित रहे।



