चीफ एडिटर – अमर नाथ साहू
रिपोर्ट – सत्यम गुप्ता

काशी में गंगा का जलस्तर लगातार तेजी से बढ़ने के कारण बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। सोमवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 69.94 मीटर दर्ज किया गया, जो इस वर्ष का अब तक का उच्चतम स्तर है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही गंगा के तटवर्ती निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है।
दूसरी ओर गंगा के बढ़े जलस्तर का असर वरुणा नदी पर भी दिखाई देने लगा है। वरुणा के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का पानी आबादी के साथ खेतों और सब्जियों की फसलों को भी डुबोने लगा है।
सुबह से रुक-रुककर बारिश होती रही

सोमवार सुबह से वाराणसी में आसमान में बादल छाए रहे और रुक-रुककर बारिश होती रही। सुबह का तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लगातार बारिश और गंगा के जलस्तर में तेज बढ़ाव से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की चिंता बढ़ गई है।
केंद्रीय जल आयोग और आपदा विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे तक गंगा के जलस्तर में वृद्धि जारी रहने की संभावना है। हालांकि, जलस्तर बढ़ने की गति में कुछ कमी आ सकती है।
घाटों का संपर्क टूटा, आरती स्थल बदला

गंगा में उफान के कारण काशी के लगभग सभी प्रमुख घाटों का आपसी संपर्क टूट गया है। अस्सी घाट पर जहां प्रतिदिन सुबह-ए-बनारस का आयोजन होता है, वह मंच एक बार फिर गंगा के पानी में डूब गया है। आरती स्थल को भी बदलना पड़ा है।
घाटों की कई दुकानें पानी बढ़ने के कारण सड़क की ओर आ गई हैं और पुराने अस्सीघाट की ओर जाने वाले मार्ग पर भी पानी बढ़ने लगा है।
हरिश्चंद्र घाट पर सड़क पर ही शवदाह की स्थिति बन गई है, जबकि मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले लोगों को लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। दशाश्वमेध से नमोघाट के बीच एनडीआरएफ और पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी गई है। दशाश्वमेध घाट स्थित जल पुलिस चौकी को मीरघाट के पास स्थानांतरित किया गया है।
नगवां नाला और आसपास के इलाके खतरे में
गंगा का पानी नगवां नाला में भी प्रवेश करने लगा है। आशंका है कि पानी सोमवार सुबह तक रामेश्वर मठ के पीछे तक पहुंच सकता है। इसके बाद नगवां, सोनकर-हरिजन बस्ती और गंगोत्री विहार के किनारे झोपड़ियों में रहने वाले दर्जनों परिवारों पर खतरा बढ़ सकता है।
रमना शवदाह स्थल पहले ही पानी में डूब चुका है। क्षेत्र के सब्जी के खेतों में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है, जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका है।
वरुणा किनारे 75 से अधिक परिवार प्रभावित
वरुणा नदी में दोबारा आई बाढ़ से सलारपुर रेलवे लाइन के किनारे से खालिसपुर, कोनिया पुल और नक्खीघाट तक कई बस्तियां प्रभावित हुई हैं। चमेलिया बस्ती, डिपो कॉलोनी और खालिसपुर में 75 से अधिक परिवार बाढ़ कॉलोनी और खालिसपुर में 75 से अधिक परिवार बाढ़ की चपेट में हैं। कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं।
सलारपुर प्राथमिक विद्यालय में चार, सरैया राहत शिविर में 34 तथा सिटी गर्ल्स स्कूल और बड़ी बाजार स्कूल के राहत शिविरों में 37 लोगों ने शरण ली है। इनमें 25 बच्चे और दो बुजुर्ग भी शामिल हैं। इसके अलावा 40 से अधिक परिवार किराये के कमरों या रिश्तेदारों के घरों में रह रहे हैं।
49 परिवारों को राहत सामग्री वितरित

बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद के लिए प्रशासन की ओर से राहत कार्य तेज किया गया है। रविवार को वरुणा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के 49 परिवारों को तहसीलदार अमृत सरोज ने विद्या विहार इंटर कॉलेज में राशन के पैकेट वितरित किए। पैकेट में चावल, दाल, तेल, नमक, चीनी समेत अन्य जरूरी खाद्य सामग्री शामिल थी।



