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वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ा, सभी घाट डूबेः मणिकर्णिका घाट डूबा, हरिश्चंद्र घाट के सीढ़ियों पर दाह संस्कार हो रहा

चीफ़ एडिटर – अमर नाथ साहू
रिपोर्ट – सत्यम गुप्ता

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वाराणसी में सोमवार सुबह से बारिश का दौर जारी है। आसमान में बादल छाए हुए हैं और लगातार हो रही बारिश के बीच तापमान 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा की रफ्तार करीब 6 किलोमीटर प्रति घंटे रही। मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटे तक मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। बारिश के साथ ही गंगा के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।
नदी का पानी करीब 5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। गंगा के बढ़ते जलस्तर ने काशी के घाटों से लेकर श्मशान घाटों तक की व्यवस्था बदल दी है। सभी प्रमुख गंगा घाट पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं और एक घाट से दूसरे घाट का संपर्क टूट गया है।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सोमवार सुबह 8 बजे वाराणसी में गंगा का जलस्तर 65.80 मीटर दर्ज किया गया। गंगा का चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर है। यानी चेतावनी बिंदु तक पहुंचने में करीब 4.46 मीटर का अंतर है। जलस्तर में जिस तेजी से वृद्धि हो रही है, उससे अगले 48 घंटे तक वाराणसी में गंगा के बढ़ने का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है।
शनिवार से शुरू हुआ तेज बढ़ाव ।

गंगा के जलस्तर में शनिवार से तेजी से बढ़ोतरी शुरू हुई। रविवार को जलस्तर बढ़ने की रफ्तार करीब 7 सेंटीमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई थी। महज 12 घंटे में लगभग तीन फीट पानी बढ़ने से घाटों की तस्वीर तेजी से बदल गई। देर रात गंगा का प्रवाह शीतला घाट के आसपास तक पहुंच गया था। प्रशासन को आशंका है कि जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो सोमवार सुबह तक गंगाजल कई मंदिरों की चौखट तक पहुंच सकता है।

प्रयागराज और मिर्जापुर में भी गंगा के जलस्तर में करीब 5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की वृद्धि दर्ज की जा रही है। केंद्रीय जल आयोग का अनुमान है कि इन क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे पानी का असर वाराणसी में भी अगले 48 घंटे तक दिखाई देगा। ऐसे में घाटों के आसपास रहने वाले लोगों और नदी किनारे के निचले इलाकों में रहने वालों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
नाव संचालन बंद, घाटों पर बढ़ाई गई निगरानी

गंगा के उफान को देखते हुए प्रशासन ने नाव संचालन पूरी तरह बंद करा दिया है। घाटों पर पुलिस, जल पुलिस और एनडीआरएफ के जवान तैनात हैं। श्रद्धालुओं, कांवरियों और स्थानीय लोगों को गहरे पानी में नहीं जाने की लगातार अपील की जा रही है। सावन सोमवार के कारण घाटों और मंदिर क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी है।

वरुणा और असि नदी के किनारे भी निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस एवं प्रशासन की टीमें निचले इलाकों में पहुंचकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की हिदायत दे रही हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

मणिकर्णिका पर 8 चितास्थल डूबे

गंगा के बढ़ते जलस्तर का सबसे गंभीर असर मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के शवदाह स्थलों पर पड़ा है। मणिकर्णिका घाट पर आठ चितास्थल जलमग्न हो गए हैं। रविवार शाम महाश्मशान नाथ मंदिर के पास केवल छह-सात चिताएं ही लग पा रही थीं। नीचे शव रखने के लिए भी सीमित जगह बची है। स्थिति बिगड़ने पर छत पर शवदाह की व्यवस्था शुरू करनी पड़ी है।

विष्णुपद क्षेत्र में भी गंगा का पानी महज कुछ सीढ़ियों की दूरी पर रह गया है। घाट के निचले हिस्से में पानी भरने से अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

हरिश्चंद्र घाट पर बदली शवदाह की व्यवस्था

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हरिश्चंद्र घाट पर भी प्लेटफॉर्म पानी में डूब गए हैं। अब सीढ़ियों पर शवदाह किया जा रहा है। सामान्य स्थिति में यहां एक साथ 10 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया जाता था, लेकिन पानी बढ़ने के बाद अब तीन से चार शवों का ही अंतिम संस्कार हो पा रहा है।

यदि गंगा का जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो सोमवार से हरिश्चंद्र घाट के ऊपर गलियों में अंतिम संस्कार कराने की स्थिति बन सकती है। इससे स्थानीय लोगों और अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिजनों के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

दुकानदारों, नाविकों और तीर्थपुरोहितों की बढ़ी मुश्किलें
गंगा के रौद्र रूप से घाट किनारे कारोबार करने वाले दुकानदारों, तीर्थपुरोहितों और नाविकों की परेशानी बढ़ गई है। पानी बढ़ने के कारण कई दुकानों और पूजा सामग्री की गुमटियों को हटाया जा चुका है। घाटों पर रोजी-रोटी चलाने वाले लोगों को अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ रहा है।

नाव संचालन बंद होने से नाविकों की आय पर भी असर पड़ा है। दूसरी ओर, घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें लोगों को पानी के करीब जाने से रोक रही हैं।
उत्तराखंड और मध्य प्रदेश की बारिश का असर

जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि पिछले 48 घंटे में गंगा के जलस्तर में तेज वृद्धि शुरू हुई है। उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में हुई भारी बारिश के कारण गंगा और यमुना में उफान आया है। इसका असर वाराणसी में भी दिखाई दे रहा है।

डीएम के अनुसार स्थिति को देखते हुए पुलिस, राजस्व विभाग और एनडीआरएफ को अलर्ट कर दिया गया है। बाढ़ से बचाव और राहत कार्यों के लिए शहर से लेकर गांवों तक टीमें गठित की गई हैं। जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी पूरी रखी गई है।

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