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गंगा का पानी उतरते ही असिघाट पर ‘जगह’ की जंगः दुकानदारों और पंडों में मारपीट; तीर्थ पुरोहित परिवार ने नगर निगम से कारवाई की उठाई मांग

चीफ एडिटर – अमर नाथ साहू
डिस्ट्रिक ब्यूरो – राकेश वलेचा

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गंगा का जलस्तर घटते ही अस्सी घाट पर जगह कब्जाने को लेकर विवाद भी सामने आने लगा है। करीब एक महीने तक बाढ़ की चपेट में रहे घाट पर पानी उतरने के बाद साफ-सफाई का काम तेज हुआ तो दुकान लगाने वाले लोगों में अपनी-अपनी जगह को लेकर विवाद शुरू हो गया। शनिवार सुबह विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में मारपीट और गाली-गलौज की स्थिति बन गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

बाढ़ के कारण अस्सी घाट का बड़ा हिस्सा सिल्ट से पट गया था। गंगा का पानी कम होने के बाद अब घाट की सीढ़ियों और आसपास के हिस्सों से सिल्ट हटाने का काम चल रहा है। इसी दौरान दुकान, चौकी और बैठने की जगह को लेकर अलग-अलग पक्ष अपना दावा करने लगे हैं।

तीर्थ पुरोहितों ने अपने स्तर से हटवाई सिल्ट

तीर्थ पुरोहित्त परिवार का आरोप है कि पानी घटने के बाद उन्होंने अपने स्तर से घाट पर जमी सिल्ट हटवाकर जगह को साफ कराया। उनका कहना है कि सफाई के बाद जब उन्होंने अपने इस्तेमाल वाली जगह को व्यवस्थित करना शुरू किया तो वहां दुकान लगाने वाले कुछ लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। दुकानदारों की ओर से कहा जा रहा है कि वे लंबे समय से इसी स्थान पर दुकान लगाते आ रहे हैं। ऐसे में पानी उतरने के बाद भी उनकी दुकानें उसी जगह लगेंगी।

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टीका-चंदन लगाने वालों की चौकियों को लेकर भी विवाद

अस्सी घाट पर विवाद केवल अस्थायी दुकानों तक सीमित नहीं है। तीर्थ पुरोहित परिवार का आरोप है कि घाट पर अवैध टीका-चंदन लगाने वाले लोगों ने भी जगह-जगह अपनी चौकियां जमा रखी हैं। सार्वजनिक घाट की सीमित जगह पर चौकियां और दुकानें लगने से श्रद्धालुओं के आवागमन में भी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, गंगा का जलस्तर बढ़ने के दौरान ये अस्थायी दुकानें और चौकियां हट गई थीं। अब जैसे-जैसे घाट का हिस्सा सूख रहा है, वैसे-वैसे पुरानी जगहों पर फिर से कब्जे की होड़ शुरू हो गई है।

नगर निगम की रसीद पर भी उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्सी घाट पर बड़ी संख्या में अस्थायी दुकानें लगती हैं। कुछ दुकानदारों का दावा है कि नगर निगम की ओर से उनकी रसीद भी काटी जाती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि घाट की सार्वजनिक जगह पर दुकान लगाने की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है और दुकानदारों को जगह का निर्धारण कौन करता है।

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