चीफ एडिटर – अमर नाथ साहू
रिपोर्ट – सत्यम गुप्ता

वाराणसी में 3 से 5 नवंबर तक छठवीं संस्कृति संसद का आयोजन होगा। सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में होने वाले इस कार्यक्रम में देश-विदेश से करीब 3000 साधु-संत, विद्वान, वैज्ञानिक और कलाकार शामिल होंगे। आयोजन में बलूचिस्तान की आजादी के मुद्दे पर चर्चा के साथ आगे की रणनीति तैयार करने पर विचार होगा। रॉ के पूर्व निदेशक एनके सूद भी अपनी पत्नी के साथ कार्यक्रम में शामिल होंगे।
संत समिति के मार्गदर्शन में होने वाले इस आयोजन में सनातन परंपरा, सामाजिक बदलाव, युवाओं की भूमिका और ऐतिहासिक मंदिरों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। आयोजकों के मुताबिक, कार्यक्रम में हिंदू आचार संहिता जारी करने, मनुस्मृति के अध्ययन के लिए समिति बनाने और मंदिरों की मुक्ति का खाका तैयार करने जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल हैं।
31 अक्टूबर से शुरू होंगी प्रतियोगिताएं
संत समिति के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि संस्कृति संसद का आयोजन दो चरणों में होगा। पहले चरण में 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक विभिन्न प्रतियोगिताएं, रंगोली, चित्रकला और कला प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी।
मुख्य आयोजन 3 से 5 नवंबर तक चलेगा। इससे पहले 2 नवंबर को दोपहर 3 बजे श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में महारुद्राभिषेक किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के भी शामिल होने की संभावना है।
जेन-जी के लिए होगा विशेष संवाद
इस बार संस्कृति संसद में युवाओं यानी जेन-जी के लिए विशेष संवाद सत्र रखा गया है। इसमें सनातन परंपरा, सामाजिक बदलाव और आधुनिकता के बीच समन्वय जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती के मुताबिक, वक्ताओं में 90 प्रतिशत युवा और 10 प्रतिशत अनुभवी विशेषज्ञ होंगे। ये वक्ता प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक अलग-अलग विषयों पर अपने विचार और तथ्य प्रस्तुत करेंगे।
हिंदू आचार संहिता और मनुस्मृति पर चर्चा
संस्कृति संसद में तीन प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श प्रस्तावित है।
आयोजकों के अनुसार, सभी के लिए सार्वजनिक हिंदू आचार संहिता जारी करने पर काम किया जाएगा।
ग्रंथ के विस्तृत अध्ययन और समीक्षा के लिए विशेष समिति गठित करने की घोषणा की जाएगी।
देश के विभिन्न विवादित और ऐतिहासिक मंदिरों से जुड़े मामलों पर रणनीतिक योजना तैयार करने पर चर्चा होगी।
कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की संभावना
आयोजकों के मुताबिक, कार्यक्रम में कई प्रमुख राजनेता, राज्यपाल, मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी सहित देश के प्रमुख धर्माचार्य शामिल होंगे। हालांकि, सभी अतिथियों की भागीदारी की अंतिम पुष्टि कार्यक्रम के दौरान ही स्पष्ट होगी।



