चीफ एडिटर – अमर नाथ साहू
रिपोर्ट – सत्यम गुप्ता

वाराणसी में बारिश और बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने मंगलवार को पूरे दिन बारिश का अलर्ट जारी किया है। रात करीब 2 बजे से लगातार हो रही बारिश के बीच सुबह तापमान 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव के मुताबिक, अगले 48 घंटे तक आसमान में बादल छाए रहने के साथ बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। वहीं, गंगा का जलस्तर सुबह 8 बजे तक 70.27 मीटर दर्ज किया गया। जो चेतावनी बिंदु के पार चला गया है।
अगस्त में 35 साल बाद रिकॉर्ड बारिश
वाराणसी में इस बार अगस्त का महीना बारिश के लिहाज से बेहद खास रहा। 35 साल बाद अगस्त में सर्वाधिक बारिश दर्ज की गई है। अगस्त में सामान्य तौर पर 245.1 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए, जबकि इस वर्ष 448 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। यह सामान्य से 82 फीसदी अधिक है। पिछले वर्ष अगस्त में 412 मिलीमीटर बारिश हुई थी।
वहीं, अगस्त 1991 में 570.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी, जो अब तक का सर्वाधिक रिकॉर्ड है। इस वर्ष 1 जून से 31 अगस्त तक वाराणसी में सामान्य 615 मिलीमीटर के मुकाबले 633.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र और उत्तर प्रदेश के उत्तर में मानसून द्रोणिका के बने रहने के कारण इस बार अच्छी बारिश हुई।
जानिए गंगा का जलस्तर बढ़ने पर कैसी है काशी की स्थिति…
12 मोहल्लों में पहुंचा बाढ़ का पानी, राहत शिविरों में परिवार

वरुणा के किनारे बसे 12 मोहल्ले बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ प्रभावित 150 से अधिक परिवार राहत शिविरों में शरण ले चुके हैं, जबकि अन्य प्रभावित परिवार परिचितों के घर या किराए के मकानों में रह रहे हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम जारी है।
राहत शिविरों में दिन में तीन बार स्वच्छ और ताजा भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए दूध और केले की भी व्यवस्था की गई है।
नगवां से अस्सी घाट तक आवागमन प्रभावित
गंगा में उफान के कारण नगवां से अस्सी घाट और जगन्नाथ मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। इससे सामान्य आवागमन बाधित हुआ है। नगवां नाले के रास्ते बाढ़ का पानी रामेश्वर मठ के पास तक पहुंच गया है।

मणिकर्णिका की गली में नाव, अंतिम संस्कार में बढ़ी परेशानी
गंगा का जलस्तर बढ़ने से अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है। मणिकर्णिका घाट की गली में नाव चल रही है। घाट तक पहुंचने के लिए लोगों को कमर भर पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। हरिश्चंद्र घाट पर भी लगातार बदलते जलस्तर के कारण प्रतिदिन शवदाह स्थल बदला जा रहा है।



