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कथावाचक प्रदीप मिश्रा बोले- पहले काशी में शांति थी, अब भीड़ः बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए, भारत माता मंदिर के सामने तिरंगा लेकर जयकारा लगाया

चीफ़ एडिटर – अमर नाथ साहू
मण्डल ब्यूरो – चन्दन रंजीत यादव

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प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। उन्होंने श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। बाबा विश्वनाथ को बेलपत्र अर्पित किए। इस दौरान सतुआ बाबा भी उनके साथ मौजूद रहे। मंदिर के आर्चक श्रीकांत मिश्र ने प्रदीप मिश्रा को पूजन कराया।
बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद प्रदीप मिश्रा ने भारत माता मंदिर के सामने लोगों को ‘घर-घर तिरंगा’ अभियान का संदेश दिया। इस दौरान भारत माता की जय के नारे भी लगाए गए। उन्होंने लोगों से देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।
पहले काशी में शांन्ति थी, अब भीड़ और ट्राफिक

काशी में बढ़ती भीड़ और यातायात व्यवस्था को लेकर
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि काशी मूल रूप से शांति की नगरी है, लेकिन अब यहां का स्वरूप काफी बदल गया है। उन्होंने कहा कि काशी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं।

इससे सड़कों पर भीड़ बढ़ती है, शोर होता है और कई जगहों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है। उन्होंने कहा कि पहले की काशी में इस तरह की भीड़ और जाम का नजारा कम देखने को मिलता था।
काशी विश्वनाथ पर हुए आक्रमण का किया जिक्र
प्रदीप मिश्रा ने काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास और उस पर हुए हमलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विधर्मियों ने काशी विश्वनाथ पर सबसे अधिक आक्रमण किए। उन्होंने मंदिर और आसपास के धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद काशी आज भी अजर-अमर की तरह खड़ी है।

उन्होंने कहा कि काशी की गलियों और मकानों के नीचे सनातन परंपरा और शिव आराधना के प्रमाण मौजूद हैं। उन्होंने दावा किया कि काशी की गलियों में किसी भी मकान की खुदाई की जाए तो शिवलिंग मिल सकता है।
बेलपत्र का अपमान न करने की अपील

पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं से बेलपत्र को लेकर विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इसका सदैव सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए जाते समय यदि रास्ते में कहीं बेलपत्र गिरा हुआ दिखाई दे तो उस पर पैर नहीं रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि रास्ते में बेलपत्र पड़ा मिले तो उसे उठाकर किसी सुरक्षित स्थान पर रख देना चाहिए। इसके बाद पूजा-अर्चना करके लौटने पर उस बेलपत्र को उचित स्थान पर प्रवाहित या विसर्जित करना चाहिए। प्रदीप मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव को प्रिय बेलपत्र का सम्मान करना भी श्रद्धा का हिस्सा है और ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

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