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वाराणसी में प्राइवेट स्कूलों पर सख्तीः 3 दिन में फीस सार्वजनिक करने का निर्देश, नोटिस बोर्ड-वेबसाइट पर देनी होगी जानकारी

चीफ एडिटर : अमर नाथ साहू
ब्यूरो चीफ : राकेश सदेजा

वाराणसी। वाराणसी में कई अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से शिकायत की है कि निजी स्कूल मनमानी फीस वसूल रहे हैं। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) भोलेंद्र प्रताप सिंह ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी मान्यता प्राप्त स्कूल संचालकों को उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2018 और 2020 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

जारी पत्र के अनुसार, हर विद्यालय को शैक्षणिक सत्र शुरू होने से कम से कम 60 दिन पहले अपनी फीस संरचना की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। यह जानकारी विद्यालय के सूचना पट्ट और वेबसाइट पर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। इसमें पिछले वर्ष, वर्तमान वर्ष और आगामी सत्र के प्रस्तावित शुल्क व निधि का पूरा विवरण देना होगा।

फीस बढ़ाने से पहले समिति की मंजूरी जरूरी

DIOS भोलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि यदि कोई विद्यालय निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे सत्र शुरू होने से कम से कम तीन माह पहले प्रस्ताव जिला शुल्क नियामक समिति के सामने रखना होगा। इसके साथ आवश्यक दस्तावेज भी जमा करने होंगे।

नियमों का पालन नहीं कर रहे कई स्कूल

उन्होंने कहा कि जिले के अधिकांश विद्यालय इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। कई स्कूल न तो फीस संरचना सार्वजनिक कर रहे हैं और न ही अभिभावकों को पारदर्शी जानकारी दे रहे हैं। यह स्थिति अधिनियम के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है।

3 दिन में जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश

DIOS ने निर्देश दिया है कि शैक्षणिक सत्र 2024-25, 2025-26 और वर्तमान सत्र 2026-27 की फीस और निधि से जुड़ी पूरी जानकारी तीन दिन के भीतर स्कूल के सूचना पट्ट और वेबसाइट पर प्रदर्शित की जाए। साथ ही यह विवरण संबंधित कार्यालय में भी उपलब्ध कराना होगा।

पालन न करने पर होगी कड़ी कार्रवाई

उन्होंने चेतावनी दी कि तय समय सीमा में आदेश का पालन नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें मान्यता पर असर पड़ने के साथ अन्य दंडात्मक कदम भी शामिल हो सकते हैं।
इस कार्रवाई से उन अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि से परेशान थे।

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