चीफ एडिटर : अमर नाथ साहू
रिपोर्टर : अभिषेक सोनकर

वाराणसी: गंगा तट पर स्थित पावन तुलसी घाट पर विश्व प्रसिद्ध नागनथैया लीला की तैयारी जोरशोर से चल रही हैं। यह अनुपम परंपरा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लगभग 500 वर्ष पूर्व प्रारंभ कराई गई थी। इस पंरपरा का आज भी निर्वहन किया जा रहा है। लक्खा मेले में शामिल इस लीला को देखने के लिए देश के विभिन्न प्रांतों के साथ ही विदेशों से भी श्रद्धालु काशी पहुंचते हैं।
कालिया नाग के फन पर नृत्य करेंगे कन्हैया…
25 अक्टूबर को तुलसी घाट पर आयोजित होने वाले नागनथैया लीला में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कालिया नाग के फन पर नृत्य का मनोरम मंचन किया जाता है। काशी के धार्मिक व सांस्कृतिक इतिहास में यह आयोजन अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। इस दौरान गंगा तट भक्तिमय वातावरण से गूंज उठता है और हर चेहरे पर दिव्य प्रसंग का अद्भुत आनंद दिखाई देता है।
राज परिवार की सहभागिता…
काशी नरेश परिवार की उपस्थिति इस आयोजन की गरिमा को और बढ़ा देती है। इस वर्ष भी कुंवर अनंत नारायण लीला में उल्लासपूर्वक शामिल होंगे। लीला में उनकी उपस्थिति परंपरा और आस्था के सम्मान का प्रतीक मानी जाती है।
अखाड़ा गोस्वामी और संकटमोचन न्यास की देख-रेख में होता है आयोजन…
आयोजन अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास की परंपरा के अनुरूप संपन्न कराया जाता है। संकट मोचन मंदिर परिवार से जुड़े प्रख्यात विद्वान और संस्कृति संरक्षक प्रोफेसर विशंभरनाथ मिश्रा लीला संचालन और संपूर्ण व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालते हैं। गंगा किनारे मंच निर्माण, सुरक्षा इंतजाम और श्रद्धालुओं के आवागमन की व्यवस्था को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है।
अनूठी धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहर…
नागनथैया केवल एक मंचन नहीं, बल्कि लोक आस्था, काशी की परंपरा और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। सैकड़ों वर्षों से चली आ रही यह लीला काशी के धार्मिक कैलेंडर का महत्वपूर्ण अध्याय मानी जाती है, जिसे देखने वालों की संख्या हर वर्ष बढ़ती ही जाती है। तुलसी घाट पर तैयारियों के बीच श्रद्धालुओं में उत्साह का वातावरण है। सभी की निगाहें अब उस क्षण पर टिकी हैं जब भगवान कृष्ण कालिया नाग के फन पर चढ़कर अपनी दिव्य महिमा का प्रदर्शन करेंगे और पूरा गंगा तट हरि-भक्ति में डूब जाएगा।।।



