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बनारस में महिला इंस्पेक्टर रिश्वत लेते धराई,एंटी करप्शन टीम पर पहले दिखाई हेकड़ी फिर गिड़गिड़ाई

प्रधान संपादक : रवि प्रताप आर्य

बनारस। वाराणसी में महिला इंस्पेक्टर को एंटी करप्शन टीम ने 10 हजार की रिश्वत लेते पकड़ लिया, फिर उसे ऑफिस से खींचकर ले गई। इंस्पेक्टर ने टीम पर रौब जमाने की कोशिश की। मामला सेटल करना चाहा, लेकिन टीम ने उसकी एक न सुनी।

उसे जबरन गाड़ी में बैठाया और कैंट थाने लेकर गई। बताया जा रहा है कि इंस्पेक्टर कॉन्स्टेबल के जरिए पैसा ले रही थी। इसके चलते कॉन्स्टेबल को भी गिरफ्तार किया गया है।

टीम कैंट थाने में महिला इंस्पेक्टर और कॉन्स्टेबल से पूछताछ कर रही है। महिला इंस्पेक्टर का नाम सुमित्रा देवी है। वह प्रयागराज की रहने वाली है। 2010 में दरोगा बनी थी। अभी वह थाना कोतवाली की प्रभारी है।

पीड़ित मेराज ने बताया- मेरे छोटे भाई की पत्नी रुकसार ने 26 अगस्त को मेरे और परिवार के 13 सदस्यों पर मुकदमा दर्ज कराया था। 2 दिन बाद यानी 28 सितंबर को इंस्पेक्टर सुमित्रा देवी घर पर आई थीं। मुझे जेल भेजने की धमकी दी।

10 अक्टूबर को मैं महिला थाने पहुंचा और इंस्पेक्टर से मिला और खुद को निर्दोष बताया। इस पर उन्होंने कहा-FIR से तुम्हारा नाम निकल जाएगा, लेकिन 20 हजार रुपए देने होंगे। 16 अक्टूबर को मैं वाराणसी के एंटी करप्शन कार्यालय पहुंचा। उन्हें पूरी जानकारी दी।

इसके बाद टीम ने पूरा जाल बिछाया। जब मैं सुमित्रा देवी के पास पहुंचा तो उन्होंने मुझसे 10 हजार रुपए मांगे। उन्होंने महिला सिपाही अर्चना राय को 10 हजार रुपए देने को कहा और नाम निकालने की बात कही गई। जैसे ही मैंने महिला सिपाही को 10 हजार रुपए दिए। वैसे ही एंटी करप्शन टीम के लोग आ गए और दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया।

लखनऊ से ट्रांसफर होकर वाराणसी आई थी इंस्पेक्टर सुमित्रा 2010 से 2021 तक लखनऊ के विभिन्न थानों और चौकियों का कार्यभार संभाल चुकी है। 2 सितंबर 2021 को लखनऊ से वाराणसी ट्रांसफर किया गया था। इसके बाद से वह वाराणसी महिला थाने की प्रभारी निरीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रही थी।
28 सितंबर, 2023 को सुमित्रा देवी को पुलिस आयुक्त ने राजातालाब थाने का प्रभारी निरीक्षक बनाया। बाद में फिर से महिला थाने में इंस्पेक्टर बनाया गया।

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