चीफ एडिटर – अमर नाथ साहू
यूपी हेड – अजय लखमानी

वाराणसी में बीएचयू के पास लंका स्थित क्लासिक कैफे में रविवार शाम 6 सितंबर को राष्ट्रवादी हिंदी साहित्यकार मंच के तत्वावधान में पुस्तक समागमन एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में साहित्य एवं काव्य के क्षेत्र में योगदान देने वाले साहित्यकारों और कवियों की मौजूदगी रही। इस दौरान डॉ. पुष्पेंद्र कुमार अस्थाना ‘पुष्प’ को साहित्यिकसम्मान एवं अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रवादी हिंदी साहित्यकार मंच के अध्यक्ष डॉ. दशरथ चौरसिया ने की जबकि मंच का संचालन वाराणसी की सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार एवं कवयित्री डॉ. झरना मुखर्जी ने किया। कार्यक्रम में काव्य श्री प्रकाशन के प्रमुख एवं साहित्यकार आनंद ‘अमित’, वाराणसी के वरिष्ठ साहित्यकार एवं गीतकार हीरालाल मिश्र ‘मधुकर’ तथा कवि शंभुनाथ शास्त्री समेत कई साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का उद्देश्य साहित्यकारों की प्रकाशित पुस्तकों को एक मंच पर लाना और उन्हें पाठकों तक पहुंचाना भी रहा। राष्ट्रवादी हिंदी साहित्यकार मंच द्वारा वाराणसी में एक साहित्यिक पुस्तकालय स्थापित किया जा रहा है।
इसी क्रम में कार्यक्रम में आमंत्रित कवि, शायर और लेखक से उनकी प्रकाशित पुस्तकें मंच के पुस्तकालय के लिए प्राप्त की गईं। इस अवसर पर साहित्यकार डॉ. पुष्पेंद्र कुमार अस्थाना ‘पुष्प’ ने भी अपनी काव्य कृति ‘फूलों की सुगंध’ मंच को भेंट की।

पुस्तक भेंट करने के उपरांत उन्हें डॉ. दशरथ चौरसिया एवं कार्यक्रम संचालिका डॉ. झरना मुखर्जी द्वारा साहित्यिक सम्मान एवं अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया गया। कवि सम्मेलन में डॉ. पुष्पेंद्र कुमार अस्थाना ‘पुष्प’ सहित विभिन्न कवियों एवं शायरों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।
कार्यक्रम में इशरत जहां, करुणा सिंह, माधुरी मिश्रा, राज बनारसी समेत अन्य रचनाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं। वहीं बीएचयू की पोएटिक सोसाइटी ‘तर्ज़-ए-सुख़न’ के सचिव अखिल राज तथा नवोदित कवि व् ग़ज़लकार और ‘तर्ज़-ए-सुख़न’ के पीआर हेड रोहित अस्थाना ‘प्रभव’ ने भी काव्य पाठ किया।

साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य, कविता और ग़ज़ल के माध्यम से साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने पर ज़ोर दिया। कार्यक्रम में हीरालाल मिश्र ‘मधुकर’ ने कहा कि साहित्य एक तपस्या है। ऐसे आयोजन नवोदित रचनाकारों को मंच देने के साथ-साथ साहित्यिक विमर्श को भी आगे बढ़ाते हैं।




