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बनारस पहुंचने से पहले रोका गया: 5 गाड़ियों को मिली अनुमति, इसलिए नहीं आए 400 गाड़ियों का था काफिला

चीफ एडिटर – अमर नाथ साहू
मण्डल ब्यूरो – चन्दन रंजीत यादव

मोकामा के विधायक अनंत सिंह का काफिला शुक्रवार को वाराणसी पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया। बिहार से प्रयागराज जा रहे अनंत सिंह को वाराणसी के डाफी इलाके में प्रशासन ने रोक दिया। उनके साथ करीब 400 गाड़ियों का काफिला चल रहा था।

प्रशासन की ओर से सिर्फ पांच गाड़ियों के साथ वाराणसी आने की अनुमति दी जा रही थी। इतनी कम गाड़ियों के साथ आने की अनुमति मिलने पर अनंत सिंह ने वाराणसी आने से मना कर दिया और सीधे प्रयागराज के लिए रवाना हो गए।

बीएचयू में मालवीय प्रतिमा पर माल्यार्पण

बीएचयू के छात्र नेता डॉ. सौरव राय ने बताया कि अनंत सिंह उनके घर आने वाले थे। उनकी माता जी से मुलाकात करने का भी कार्यक्रम था। इसके अलावा बीएचयू में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण करना था।

डॉ सौरव राय ने बताया कि उन्होंने प्रशासन से पहले ही कार्यक्रम की अनुमति दी थी, लेकिन बाद में चार सौ गाड़ियों के काफिले को डाफी पर ही रोक दिया। केवल छह गाड़ियों को अंदर आने की अनुमति थी, इस पर अनंत सिंह ने कहा कि छह गाड़ियों के साथ वो नहीं जाएंगे और कैफिला वहीं से प्रयागराज चला गया।

बेटी की शादी का कार्ड बांटने भी निकले थे अनंत सिंह

अनंत सिंह बिहार से प्रयागराज जा रहे थे। उन्हें अपने पुराने मित्र पप्पू सलमान के बेटे की शादी के वलीमा में शामिल होना था। इस दौरान वह अपनी बेटी शिवांगी की 25 नवंबर को होने वाली शादी का निमंत्रण भी बांट रहे थे। रास्ते में आरा, बक्सर और चंदौली में समर्थकों ने उनका स्वागत किया। चंदौली में उन्होंने भाजपा विधायक सुशील सिंह से मुलाकात कर उन्हें बेटी की शादी का कार्ड भी दिया था।

24 अक्टूबर को जेडीयू ने छह साल के लिए किया निष्कासित

अनंत सिंह बिहार के मोकामा से विधायक हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने 24 अक्टूबर को उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पार्टी ने उन पर अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया था।

दरअसल, बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट के चुनाव में अनंत सिंह ने जेडीयू के उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया था। उन्होंने पार्टी नेतृत्व के निर्देशों के विपरीत प्रचार भी किया। इसके अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ बयान देने के आरोप भी लगे थे। इसी के बाद जेडीयू ने उनके खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई की।

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