HomeUncategorizedकाशी के स्टेशनों पर नहीं हो रही बैग की चेकिंग: दो दिन...

काशी के स्टेशनों पर नहीं हो रही बैग की चेकिंग: दो दिन पहले मिली थी बम से उड़ाने की धमकी, निशाने पर नगर निगम बीएचयू और सीएचएस

चीफ एडिटर – अमर नाथ साहू
रिपोर्ट – अभिषेक सोनकर

धनतेरस और दीपावली को देखते हुए वाराणसी के रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ बढ़ गई है। ट्रेनों में सीटों से ज्यादा यात्री दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही नजर आ रही है। वाराणसी के दो प्रमुख रेलवे स्टेशनों- वाराणसी जंक्शन (कैंट) और बनारस स्टेशन पर यात्रियों के बैग की एक्स-रे मशीन से नियमित जांच नहीं हो रही है।

बता दें कि दो दिन पहले ही वाराणसी नगर निगम, काशी हिंदू विश्वविद्यालय और सीएचएस को ई-मेल भेजकर 8 नवंबर को बम धमाके की धमकी दी गई थी।

मशीन चालू फिर भी नहीं हो रही चेकिंग

कैंट स्टेशन पर बैग जांचने की एक्स-रे मशीन चालू है। यहां अनाउंसमेंट भी किया जा रहा है कि यात्री अपना बैग चेक कराकर आगे जाएं। इसके बावजूद यात्रियों के सामान की सख्ती से जांच होती नजर नहीं आई।

वहीं, बनारस स्टेशन पर गेट नंबर एक पर लगी एक्स-रे मशीन बंद मिली। प्लेटफॉर्म नंबर आठ की तरफ से आने वाले गेट पर बैग जांचने की मशीन की व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में यात्री बिना बैग की जांच कराए स्टेशन के अंदर पहुंच रहे हैं।

8 नवंबर को धमाके की धमकी, 27 नवंबर तक का जिक्र

खालिस्तान नेशनल आर्मी के नाम से भेजे गए ई-मेल में वाराणसी, मथुरा और अयोध्या में 8 नवंबर से 27 नवंबर तक सिलसिलेवार धमाकों की धमकी दी गई है। वाराणसी नगर निगम, बीएचयू और सीएचएस को भी धमकी भरे संदेश भेजे गए हैं। इसके बाद पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हैं। स्कूलों, मंदिरों और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाने की बात कही गई है।

पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के मुताबिक, धमकी भरे ई-मेल की जांच केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं। नगर निगम, बीएचयू, स्कूलों और प्रमुख मंदिरों की सुरक्षा बढ़ाई गई है। सभी थानों को अलर्ट किया गया है।

2006 में कैंट स्टेशन भी था आतंकियों के निशाने पर

वाराणसी में इससे पहले भी आतंकी हमले हो चुके हैं। 7 मार्च 2006 को शहर में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। पहला धमाका संकटमोचन मंदिर में हुआ। इसके बाद कैंट रेलवे स्टेशन के वेटिंग एरिया और शिवगंगा एक्सप्रेस में भी बम धमाके हुए। इस हमले में 28 लोगों की मौत हुई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे।

इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। बाद में दशाश्वमेध घाट पर 23 फरवरी 2005 को हुए धमाके को भी आतंकी हमला माना गया। 2006 के हमले में कैंट स्टेशन के वेटिंग एरिया और दिल्ली जाने वाली शिवगंगा एक्सप्रेस को निशाना बनाया गया था।

RELATED ARTICLES

Most Popular