चीफ एडिटर – अमर नाथ साहू
रिपोर्ट – सत्यम गुप्ता

दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए इस बार तीन स्थिर लग्न में मुहूर्त रहेगा। 8 नवंबर को दोपहर 1:22 बजे से रात 2:40 बजे तक तीन अलग-अलग समय पर पूजा की जा सकेगी।
ज्योतिषाचार्य श्रीराम शर्मा के मुताबिक, पहला मुहूर्त कुंभ लग्न, दूसरा वृष लग्न और तीसरा सिंह लग्न में रहेगा। गृहस्थों के लिए शाम का वृष लग्न विशेष शुभ माना गया है। इस दौरान शाम 6 से 7:54 बजे तक पूजा की जा सकेगी।
वहीं, बड़े व्यापारी रात 12:26 से 2:40 बजे तक सिंह लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि स्थिर लग्न में पूजा करने से घर और कारोबार में धन-संपत्ति, सुख-समृद्धि और वैभव बना रहता है।
पूजा में कमल का फूल, लाल वस्त्र और श्रीसूक्त पाठ का विशेष महत्व बताया गया है।

तीन स्थिर लग्न में पूजा का मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य श्रीराम शर्मा ने बताया कि दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के लिए तीन स्थिर लग्न में मुहूर्त रहेगा।
कुंभ लग्नः दोपहर 1:22 से 2:53 बजे तक।
वृष लग्नः शाम 6 से 7:54 बजे तक।
सिंह लग्नः रात 12:26 से 2:40 बजे तक।
उन्होंने बताया कि गृहस्थों के लिए शाम का वृष लग्न विशेष शुभ माना गया है। वहीं, बड़े व्यापारी रात के सिंह लग्न में भी लक्ष्मी पूजन करते हैं।
वृष, सिंह, वृश्चिक और कुंभ चार स्थिर राशियां
ज्योतिष में 12 राशियों को चर, स्थिर और द्विस्वभाव तीन श्रेणियों में बांटा गया है। वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ चार स्थिर राशियां हैं। इन राशियों के उदय होने के समय को स्थिर लग्न कहा जाता है।
स्थिर का अर्थ है अपनी जगह पर बने रहना और जल्दी बदलाव न होना। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, स्थिर लग्न में पूजा करने से घर और कारोबार में धन-संपत्ति, सुख-समृद्धि और वैभव बना रहता है। इसी वजह से दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के लिए स्थिर लग्न को विशेष महत्व दिया जाता है।
लाल वस्त्र, कमल का फूल और श्रीसूक्त से करें लक्ष्मी पूजन
ज्योतिषाचार्य श्रीराम शर्मा ने बताया कि दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा से पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। मां लक्ष्मी का लाल वस्त्रों से श्रृंगार करें। उन्हें कमल का फूल अर्पित करें, क्योंकि कमल मां लक्ष्मी का प्रिय पुष्प माना जाता है।
इसके साथ फल, नैवेद्य और साबुत धनिया चढ़ाएं।
धूप-दीप जलाकर विधि-विधान से पूजन करें। पूजा के दौरान श्रीसूक्त का पाठ अवश्य करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि इससे मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।

भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में मनाते हैं दीपावली
दीपावली मनाने के पीछे धार्मिक मान्यता भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने से जुड़ी है। मान्यता है कि दशहरे के दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। इसके बाद लंका में विभीषण को राजगद्दी सौंपकर माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे।
उनके अयोध्या पहुंचने की खुशी में नगरवासियों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था। तभी से दीप जलाने और दीपोत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है।



