चीफ एडिटर – अमर नाथ साहू
रिपोर्ट – अभिषेक सोनकर

वाराणसी में दीपावली के पूर्व और बाद में घरों में पूजा-पाठ के बाद बची हुई सामग्री को गंगा में विसर्जित करने की परंपरा के चलते नदी में प्रदूषण बढ़ता है। इसे रोकने के लिए शनिवार को नमामि गंगे के स्वयंसेवक और नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने लोगों से घर की बची हुई और बासी पूजन सामग्री गंगा या उसकी सहायक नदियों में न बहाने की अपील की। इस दौरान संकठा घाट पर सफाई अभियान चलाया गया।
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की ओर से चलाए जा रहे निर्मल गंगा अभियान के तहत स्वयंसेवियों ने संकठा घाट से मणिकर्णिका घाट तक लोगों को जागरूक किया। गंगा तट पर सफाई करते हुए लोगों को बताया गया कि पूजन सामग्री और अन्य कचरा नदियों में डालने से जल प्रदूषित होता है। राजेश शुक्ला ने बताया कि वे पिछले 15 वर्षों से प्रतिदिन मां गंगा की सफाई में जुटे हैं।
उन्होंने कहा कि पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का अपना महत्व है, लेकिन उसे नदियों में बहाने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। आमजन के जागरूक होने और अपनी जिम्मेदारी समझने से ही गंगा को स्वच्छ रखा जा सकता है। स्वच्छता केवल सफाई कर्मियों और सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी दायित्व है।
उन्होंने लोगों से अपनी सोच बदलने और स्वच्छता को नैतिक जिम्मेदारी मानकर उसका पालन करने की अपील की।




