चीफ एडिटर – अमर नाथ साहू
यूपी हेड – अजय लखमानी

रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला में आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। रामलीला के धार्मिक अनुष्ठानों की कड़ी में द्वितीय श्री गणेश पूजन विधि-विधान से संपन्न हुआ। करीब दो घंटे तक चले पूजन, संकल्प और रामचरितमानस के पाठ के दौरान रामनगर का वातावरण पूरी तरह राममय और भक्तिमय बना रहा। गणेश वंदना और नारद वाणी में मानस की चौपाइयों के गायन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराई। वाराणसी के रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला 25 सितंबर 2026 अनंत चतुर्दशी से विधिवत शुरू होगी।
पूजन की शुरुआत भगवान गणेश की वंदना से हुई। रामायणी दल ने नारद वाणी में विनयपत्रिका की पंक्ति ‘गाइए गणपति जग वंदन, शंकर सुवन भवानी के नंदन’ का भावपूर्ण गायन किया। मंगलाचरण की भक्तिमय प्रस्तुति के बीच श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए। इसके बाद ‘मागत तुलसीदास कर जोरे। बसहु राम-सिय मानस मोरे॥’ का पाठ हुआ। इस पंक्ति के माध्यम से प्रभु श्रीराम और माता सीता के हृदय में वास की कामना की गई।
राजा, प्रजा और श्रद्धालुओं के कल्याण का लिया संकल्प
रामनगर रामलीला की वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार रामलीला अधिकारी पाठक जी ने जजमान के रूप में पंडित रामनारायण पांडेय से संकल्प पूजन कराया। संकल्प में रामलीला के निर्विघ्न और सफल आयोजन के साथ राजा, प्रजा, लीला देखने और सुनने वाले श्रद्धालुओं तथा आयोजन से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं के कल्याण की कामना की गई।
पंडित रामनारायण पांडेय और शांत नारायण पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ पूजन संपन्न कराया। अनुष्ठान में रामलीला के पंच स्वरूप श्रीराम, सीता, भरत, शत्रुघ्न और लक्ष्मण के साथ वशिष्ठ, दशरथ, रामलीला व्यास, रामायणी दल और अन्य सहायक पात्र शामिल रहे।
पूजन के बाद रामचरितमानस के बालकांड में मंगलाचरण से सात दोहे तक का नारद वाणी में पाठ किया गया। मानस की चौपाइयों और पदों का गायन सुनकर लीला प्रेमी श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालुओं को रामकथा के माध्यम से मर्यादा, संस्कार, श्रद्धा और जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का संदेश भी मिला।
229 साल पुरानी परंपरा, 40 खुले मंचों पर जीवंत होती है रामकथा
रामनगर की रामलीला करीब 229 साल पुरानी परंपरा है। इसकी अनूठी प्रस्तुति और सांस्कृतिक विरासत को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में भी स्थान मिला है। करीब 10 किलोमीटर के दायरे में 40 खुले मंचों पर रामचरितमानस के प्रसंगों का मंचन होता है। यही वजह है कि रामनगर की रामलीला को दुनिया की सबसे बड़ी और अनूठी रामलीलाओं में शामिल किया जाता है।
करीब 30 दिनों तक चलने वाली इस रामलीला में देश-विदेश से पांच लाख से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। इन दिनों रोजाना रात करीब 10 बजे तक 10 से 20 हजार दर्शक अलग-अलग लीला स्थलों पर पहुंच रहे हैं। वहीं प्रमुख प्रसंगों वाले दिनों में दर्शकों की संख्या एक लाख तक पहुंच जाती है।



