चीफ़ एडिटर – अमर नाथ साहू
रिपोर्ट – अभिषेक सोनकर

वाराणसी में करबला के 72 शहीदों और शिया मुसलमानों के 11वें इमाम हसन असकरी की याद में दालमंडी से शनिवार सुबह अमारी का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस दो महीने 8 दिन चलने वाले शिया मुस्लमानों के गम के महीने का अंतिम जुलूस होता है।
जुलूस दालमंडी स्थित शब्बरो सफ़दर के इमामबाड़े से निकाला गया। दरगाह फातमान, लल्लापुरा में जाएगा। इसमें आसपास के जिलों से भी बड़ी तादाद में जायरीन पहुंचे हैं।
सन 61 हिजरी में इमाम हुसैन हुए थे करबला में शहीद
लखनऊ से आए मौलाना इरशाद अब्बास ने बताया -इमाम हुसैन और उनके साथियों को करबला की सरजमीं पर सन 61 हिजरी को 10 मोहर्रम के दिन में उस वक्त के दुर्दान्त आतंकवादी यजीद और उसकी फौज ने तीन दिन का भूखा प्यासा शहीद कर दिया था।
तब से शिया मुसलमान इमाम हुसैन और उनके साथ शहीद हुए उनके भाई, बेटे और साहबियों की शहादत का ग़म मनाते हैं जो इस्लामिक महीने मोहर्रम की एक तारीख से शुरू होकर इस्लामिक माह रबीअव्वल की 8 तारीख तक मनाया जाता है।
आज ही मदीना लौटे थे इमाम हुसैन के घरवाले
उन्होंने बताया – इमाम हुसैन के घरवाले 8 रबीअव्वल को कर्बला के वाकये के बाद मदीना लौटे थे। ऐसे में शिया मुसलमान उनके मदीने आने का गम मनाते हैं क्योंकि जब इमाम हुसैन गये थे तो उनके काफिले में जनाबे अब्बास, जनाबे अली अकबर, जनाबे कासिम, जनाबे सकीना, जनाबे अली असगर मौजूद थे लेकिन जब वापस लौटे तो इमाम हुसैन और उनके सभी घरवाले शहीद हो चुके हैं।
जुलूस में अंजुमन हैदरी करेगी नौहा मातम
जुलूस के संयोजक असकरी रजा सईद ने बताया जुलूस सुबह 8 बजे उठा और दालमंडी से होता हुआ नई सड़क पहुंचेगा । वहां ज़ंजीर मातम होगा। इसके बाद जुलूस कालीमहल पहुंचेगा। जहां मजलिस होगी और नौहा मातम होगा।
जुलूस शाम 6 बजे दरगाह फातमान में समाप्त होगा। जिसमें अलम, ताबूत, दुलदुल, और अमारी रहेगी। जुलूस में अंजुमन हैदरी चौक बनारस नौहाख्वानी व मातम करेगी।




