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समरसता ही सनातन का आधार है: प्रांत प्रचारक रमेश जी,मकर संक्रांति उत्सव पर गूंजा भारतीय संस्कृति व सामाजिक समरसता का संदेश

ब्यूरो रिपोर्ट : रवि प्रताप आर्य

बलिया। रसड़ा स्थित बाबा रामदेव सूरजदेव पीजी कॉलेज के विशाल सभागार में बुधवार को मकर संक्रांति का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास एवं सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में स्वयंसेवक, छात्र-छात्राएं एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरक्ष प्रांत के प्रांत प्रचारक श्री रमेश जी रहे। उन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि “हमारे त्योहार केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार और संस्कारों के आधार हैं। उत्सव जीवन में उत्साह भरते हैं और पर्व समाज में हर्ष व एकता का भाव जागृत करते हैं। हमें अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति पर गर्व होना चाहिए।”


प्रांत प्रचारक रमेश जी ने कहा कि अनेक आक्रमणों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय संस्कृति आज भी जीवंत है, क्योंकि भारतीय समाज सामूहिक रूप से त्योहार मनाने की परंपरा को जीवित रखे हुए है। भारतीय समाज की सबसे बड़ी विशेषता सामाजिक समरसता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “संघ का मानना है कि यदि छुआछूत पाप नहीं है, तो दुनिया में कुछ भी पाप नहीं है।”


उन्होंने सभी से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि संघ से जुड़ने का अर्थ है अपनी जड़ों से, भारत और भारतीय संस्कृति से जुड़ना। इतिहास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि मुगल आक्रमणों और अत्याचारों के परिणामस्वरूप भारत में बाल विवाह, पर्दा प्रथा जैसी अनेक कुप्रथाएं आईं, जो आज भी किसी न किसी रूप में समाज में मौजूद हैं। हमें इन्हें समाप्त करने का संकल्प लेना होगा।


प्रांत प्रचारक जी ने कहा कि भारतीय समाज में नारी का सदैव सम्मान रहा है। भगवान शंकर के साथ माता गौरी, सीता-राम, राधे-श्याम जैसे संबोधन इस बात का प्रतीक हैं कि पुरुष की पूर्णता प्रकृति अर्थात नारी के साथ जुड़ने पर ही होती है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद द्वारा शिकागो धर्म सम्मेलन में भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और परंपरा के दिए गए संदेश को स्मरण कराते हुए समाज को सशक्त बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जीवन सबरी, जटायु और निषादराज गुह जैसे पात्रों के साथ उनके संबंधों के कारण सामाजिक समरसता का आदर्श प्रस्तुत करता है। आज आवश्यकता है कि भारत में गुरुकुल परंपरा के अनुरूप शिक्षा पद्धति विकसित हो, जिससे चरित्रवान, देशभक्त एवं भारत-भारतीयता के लिए समर्पित युवा तैयार हो सकें।


कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीनाथ मठ, पटना के महंत पूज्य सत्यनारायण गिरी जी ने की।
विशिष्ट रूप से उपस्थित जनों में बलिया विभाग के विभाग प्रचारक अंबेश जी, नवीन जी, रसड़ा जिले के जिला प्रचारक अनुपम जी, कॉलेज के प्रबंधक श्री मृगेंद्र बहादुर सिंह जी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रदेश महा सचिव शिवेंद्र बहादुर सिंह, , डॉ काशी नाथ सिंह जी, डॉ आशुतोष सिंह जी कर्नल नलिनी सिंह, श्री , रुद्र प्रताप सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख अनिल सिंह, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सोनी, राजीव सिंह चंदेल राजेश तिवारी, प्रबंधक गोविंद नारायण सिंह विवेकानंद सिंह जी धर्मेन्द्र सिंह जी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति एवं सांस्कृतिक चेतना के संदेश के साथ हुआ।

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