चीफ एडिटर – अमर नाथ साहू
मण्डल ब्यूरो – रोहित गुप्ता

नगर निगम कार्यालय के पास लगी करीब 200 गुमटियों को हटाने की कार्रवाई को लेकर दुकानदारों में नाराजगी है। यहां 30 से 40 साल से ठेला और गुमटी लगाकर परिवार चलाने वाले दुकानदारों का कहना है कि नगर निगम ने पहले उनका रजिस्ट्रेशन किया, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत लोन दिलाया और अब उन्हें अवैध बताकर हटाया जा रहा है।
दुकानदारों ने सवाल उठाया कि अगर उनका कारोबार अवैध है तो नगर निगम ने उनका पंजीकरण क्यों किया। उन्होंने मांग की है कि हटाने से पहले उन्हें दूसरी जगह दुकान लगाने की व्यवस्था दी जाए। इस संबंध में दुकानदारों ने नगर निगम को ज्ञापन भी सौंपा है।
40 साल से लगा रहे गुमटियां, अब हटाने की कार्रवाई
दुकानदारों का कहना है कि वे कई दशकों से नगर निगम कार्यालय के पास कारोबार कर रहे हैं। प्रेमा नाम की दुकानदार ने बताया कि वह करीब 40 साल से यहां दुकान लगा रही हैं।
उनका कहना है कि वे सड़क पर ठेला नहीं लगातीं, बल्कि किनारे पर बैठकर कारोबार करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि नगर निगम उन्हें हटाना चाहता है तो पहले सभी दुकानदारों को दूसरी जगह दे। अचानक दुकानें हटने से परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
दुकानदारों के मुताबिक, नगर निगम के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि ठेले और गुमटियां नहीं हटाई गईं तो उन्हें तोड़ दिया जाएगा। इससे पहले रविवार को नगर निगम की कार्रवाई के दौरान एक ठेले को पलट दिया गया था। दुकानदारों का आरोप है कि आए दिन उन्हें एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए कहा जाता है।
दिनेश बोले- निगम ने रजिस्ट्रेशन किया, लोन भी दिलाया
दुकानदार दिनेश कुमार कन्नौजिया ने बताया कि वे करीब 30 साल से यहां दुकान लगा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत बैंक से पहले 10 हजार, फिर 15 हजार और इसके बाद 25 हजार रुपए का लोन लिया है।
उनका कहना है कि नगर निगम ने उनका रजिस्ट्रेशन कराया था और इसी के आधार पर उन्हें कारोबार के लिए लोन मिला। दिनेश ने सवाल उठाया कि अगर वे अवैध हैं तो नगर निगम ने उनका रजिस्ट्रेशन क्यों किया? अब दुकान हटने पर वे लोन की किस्त कैसे चुकाएंगे और परिवार का खर्च कैसे चलाएंगे।

दुकानदारों ने मांगी वैकल्पिक जगह, बोले- रोजगार खत्म हो जाएगा
दुकानदारों का कहना है कि वे कार्रवाई का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन उन्हें पहले वैकल्पिक जगह दी जाए। कुछ दुकानदारों ने सुझाव दिया कि नगर निगम किसी उपयुक्त स्थान पर दुकानें बनाकर उन्हें उचित किराए पर दे सकता है।
उनका कहना है कि बिना लिखित अनुमति के किसी दूसरी जगह दुकान लगाने पर पुलिस कार्रवाई का डर रहेगा। दुकानदारों ने बताया कि वे पहले भी जनप्रतिनिधियों और नगर निगम अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
दुकानदारों के मुताबिक यहां करीब 200 गुमटियां हैं और इनसे कई परिवारों की आजीविका जुड़ी है। उन्होंने नगर निगम से मांग की है कि गुमटियां हटाने से पहले सभी प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। इसी मांग को लेकर उन्होंने नगर निगम को ज्ञापन सौंपा है।



