चीफ एडिटर – अमर नाथ साहू
मण्डल ब्यूरो – चंदन रंजीत यादव

काशी में अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव ‘लॉन्ग नाइट ऑफ लिटरेचर्स 2026’ के छठे संस्करण का शुभारंभ हुआ। अस्सी घाट स्थित एलिस बोनर इंस्टीट्यूट में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में यूरोप के नौ देशों के साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से पाठकों से जुड़ रहे हैं। आयोजन में कविता और कहानियों के साथ अलग-अलग देशों की साहित्यिक परंपराओं, विचारों और अनुभवों को साझा किया जा रहा है।
यूरोपीय संघ के सांस्कृतिक संस्थानों (EUNIC इंडिया), यूरोपीय दूतावासों और एलिस बोनर इंस्टीट्यूट की ओर से आयोजित यह उत्सव यूरोपीय और भारतीय साहित्य के बीच संवाद का मंच बन रहा है। इसका उद्देश्य विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के साहित्य को एक-दूसरे के करीब लाना है। गंगा तट पर आयोजित इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय लेखकों को सुनने और उनकी रचनाओं को समझने का अवसर मिल रहा है।
उत्सव की खास बात इसका सत्र संचालन है। प्रत्येक सत्र को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहले 20 मिनट में संबंधित देश के साहित्यकार अपनी मूल भाषा में कविता और गद्य का पाठ कर रहे हैं। इसके बाद अगले 20 मिनट तक भारतीय विद्वान, शोधकर्ता और प्राध्यापक लेखक के साथ उनकी रचनाओं और उनसे जुड़े विषयों पर चर्चा कर रहे हैं। इस तरह श्रोताओं को रचनाओं को सुनने के साथ उनके भाव, संदर्भ और विचारों को समझने का भी मौका मिल रहा है।
एलिस बोनर इंस्टीट्यूट के निदेशक एवं सचिव अनूप कुमार शर्मा ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह आयोजन काशी की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक साहित्य से जोड़ने की अनूठी पहल है। इसके माध्यम से अलग-अलग देशों के रचनाकारों को बनारस की विद्वत परंपरा से जुड़ने और अपने विचार साझा करने का अवसर मिल रहा है।
पहले दिन चार देशों के साहित्यकारों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम के पहले दिन पुर्तगाल की डायना वी. अल्मीडा, फ्रांस के ओलिवियर लिरोन, स्लोवेनिया की अना स्वेतेल और ऑस्ट्रिया की डॉ. फ्रेडरिक गोसवेनर अपनी रचनाओं का पाठ कर रहे हैं। वहीं, दूसरे दिन जर्मनी के क्रिस्टोफर क्लोएबल, पोलैंड की मार्गो रेजमेर, इटली के एंटोनियो फ्रांकिनी, एस्टोनिया की लिली लूक और स्विट्जरलैंड के मार्को मिलाडिनोविक कार्यक्रम में शामिल होंगे।



