चीफ़ एडिटर – अमर नाथ साहू
डिस्ट्रिक ब्यूरो – राकेश वलेचा

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में सारनाथ के शामिल होने के बाद केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मंगलवार को सारनाथ पहुंचे। उन्होंने यहां स्थित प्राचीन स्तूप और अन्य पुरातात्विक स्थलों का निरीक्षण किया तथा इसे भारत, उत्तर प्रदेश और पूरे बौद्ध जगत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा – सारनाथ का यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होना देशवासियों के लिए अत्यंत गर्व और सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में यह उपलब्धि संभव हो सकी है। उन्होंने बताया कि सारनाथ अब भारत का 45वां यूनेस्को विश्व धरोहर स्मारक बन गया है।
अब सारनाथ के सुविधाओं में होगा और विकास
गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा – भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े चार प्रमुख पवित्र स्थलों में सारनाथ का विशेष महत्व है। यहीं भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश देकर धर्मचक्र प्रवर्तन किया था। सारनाथ से निकला शांति, करुणा और अहिंसा का संदेश आज भी दुनिया के करोड़ों लोगों के जीवन का आधार बना हुआ है। ऐसे में इस ऐतिहासिक स्थल को वैश्विक स्तर पर मिली यह मान्यता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने विश्वास जताया कि यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद सारनाथ में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे वाराणसी और आसपास के क्षेत्र में पर्यटन, स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा।
1998 में यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल किया गया था
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सारनाथ को वर्ष 1998 में यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल किया गया था। इसके बाद लंबे समय तक विभिन्न स्तरों पर तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं चलीं। उन्होंने कहा कि जनवरी 2020 से इस दिशा में प्रयासों को और गति दी गई। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ संस्थाओं द्वारा कई चरणों में निरीक्षण, मूल्यांकन और तकनीकी परीक्षण किए गए। अंततः दक्षिण कोरिया में आयोजित यूनेस्को की बैठक में सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भारत
की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं। वर्ष 2014 के बाद से भारत हर वर्ष अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को यूनेस्को की सूची में शामिल कराने में सफलता प्राप्त कर रहा है, जिससे देश की विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।



